सोने-चांदी की गिरावट और ज्योतिष, ग्रहों की चाल ने बिगाड़ा बाजार, क्या कहता है आपका भविष्य ?
30 जनवरी 2026 का दिन भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में एक काले शुक्रवार की तरह दर्ज किया गया। चांदी में 1 लाख रुपये से ज्यादा की गिरावट और सोने का 20 हजार रुपये प्रति दस ग्राम तक टूटना महज एक आर्थिक घटना नहीं है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो ब्रह्मांड में ग्रहों की बदलती चाल और भारी 'ग्रह दोष' इस तबाही की मुख्य वजह हैं। आइए जानते हैं कि इस गिरावट के पीछे कौन से ग्रह जिम्मेदार हैं और आने वाला समय निवेशकों के लिए कैसा रहेगा।
सोने और चांदी का ग्रहों से संबंध
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सोना (Gold): यह बृहस्पति (गुरु) और सूर्य का प्रतिनिधित्व करता है। गुरु धन, वृद्धि और समृद्धि का कारक है।
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चांदी (Silver): यह चंद्रमा और शुक्र से प्रभावित होती है। चंद्रमा मन की चंचलता और लिक्विडिटी (नकदी) का प्रतीक है।
गिरावट के मुख्य ज्योतिषीय कारण
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गुरु और शनि का द्वंद्व: वर्तमान में गुरु (बृहस्पति) पर शनि की नीच दृष्टि या क्रूर ग्रहों का प्रभाव सोने की कीमतों में स्थिरता को खत्म कर रहा है। जब भी गुरु पीड़ित होता है, तो सोने के भाव 'बबल' की तरह फूटते हैं।
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शुक्र और राहु की युति: चांदी में आई 26% की भारी गिरावट शुक्र और राहु के नकारात्मक योग का परिणाम है। राहु भ्रम पैदा करता है, जिससे निवेशकों में डर (Panic) फैलता है और वे अचानक बिकवाली करने लगते हैं।
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चंद्रमा की कमजोरी: चांदी का सीधा संबंध चंद्रमा से है। शुक्र-चंद्र की युति में जब पाप ग्रहों का हस्तक्षेप होता है, तो कीमती धातुओं के ईटीएफ (ETF) और कमोडिटी बाजार क्रैश कर जाते हैं।
क्या कहती है भविष्य की गणना?
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फरवरी में संभलकर चलें: ज्योतिषीय गणना के अनुसार, फरवरी के दूसरे सप्ताह तक बाजार में अस्थिरता (Volatility) बनी रहेगी। ग्रहों का वक्री होना यह संकेत देता है कि अभी कीमतें और भी नीचे जा सकती हैं।
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मार्च से शुरू होगी 'गोल्डन' रिकवरी: मार्च 2026 के अंत में जब ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा, तब बाजार में सुधार के संकेत मिलेंगे। सोना एक बार फिर अपनी पुरानी चमक की ओर बढ़ेगा।
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दीर्घकालिक निवेश का सही समय: ज्योतिष के अनुसार, यह गिरावट 'ग्रहों के शोधन' की तरह है। जो लोग लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक शुभ अवसर हो सकता है क्योंकि गुरु अंततः वृद्धि ही प्रदान करता है।
आर्थिक विश्लेषक भले ही इसे डॉलर की मजबूती या फेड रेट का असर कहें, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहों का संतुलन है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे धैर्य रखें और अपनी कुंडली में गुरु व शुक्र की स्थिति देखकर ही बड़ा निर्णय लें।
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लेखक के बारे में
मुज़फ्फरनगर के प्रमुख ज्योतिषविद संजय सक्सेना पिछले 25 वर्षों से 'शिवालिक राशिरत्न केंद्र' के माध्यम से ज्योतिष, वास्तु और रत्न विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। संजय जी को ज्योतिष की गहन और प्रामाणिक शिक्षा वेदपाठी भवन के विख्यात विद्वान प्रियशील चतुर्वेदी (रतन गुरु) जी के सानिध्य में प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि उनके गुरु रतन गुरु जी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पूर्व कुलपति एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय सीता राम चतुर्वेदी जी के सुपुत्र हैं, जिससे संजय सक्सेना जी को एक अत्यंत समृद्ध और विद्वान गुरु-परंपरा का लाभ मिला है।
संजय सक्सेना जी की सबसे बड़ी विशेषज्ञता 'प्रश्न लग्न' में है। ज्योतिष की यह एक ऐसी विधा है जिसमें बिना जन्म कुंडली के भी जातक की तात्कालिक समस्याओं का सटीक विश्लेषण किया जा सकता है। अपनी इस विशेषज्ञता और ढाई दशकों के अनुभव के आधार पर वे न केवल सटीक भविष्यवाणी करते हैं, बल्कि वास्तु और रत्नों के माध्यम से प्रभावी समाधान भी प्रदान करते हैं। उनकी पारखी नज़र और शास्त्रीय ज्ञान ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विश्वसनीय ज्योतिषियों में शामिल किया है। ज्योतिषीय परामर्श, वास्तु ज्ञान या शुद्ध रत्नों की जानकारी हेतु उनसे मोबाइल नंबर 9837400222 पर संपर्क किया जा सकता है।

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