सच्चा सुख और आंतरिक शांति पाने का मार्ग
आज की भागदौड़ भरी दुनिया में इंसान चांद तक पहुंचने का हुनर तो सीख गया है लेकिन धरती पर शांति से रहने की कला भूलता जा रहा है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सुख बाहर की वस्तुओं या उपलब्धियों में नहीं बल्कि हमारे जीवन जीने के अंदाज पर निर्भर करता है। अक्सर हम अपने पूर्व कर्मों के अनुसार प्राप्त हुई स्थिति से संतुष्ट होने के बजाय अधिक से अधिक पाने की अंतहीन चेष्ठा में लग जाते हैं। यही लालसा हमें बेबस कर देती है और अंततः हम उस सुख को भी खो देते हैं जो हमारे पास पहले से मौजूद है।
जीवन जीना एक अद्भुत कला है और हर व्यक्ति के भीतर सुख-शांति का एक गहरा सागर समाया हुआ है। जब तक हम अपने भीतर की दिव्यता को नहीं जगाएंगे और केवल अपने लिए जीने के बजाय दूसरों के काम आना नहीं सीखेंगे तब तक परम सुख की प्राप्ति असंभव है। मनुष्य के भीतर का देवत्व तभी जागता है जब वह परोपकार की राह पर चलता है। केवल भौतिक साधनों को जुटाना ही जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए क्योंकि साधन कभी भी शांति की गारंटी नहीं दे सकते।
असली सुख का आधार हमारा परिवार और वहां का वातावरण होता है। यदि परिवार में कलह और क्लेश का माहौल रहेगा तो तमाम सुख-सुविधाओं के बावजूद संतोष और शांति कोसों दूर रहेगी। हमें अपना समय और ऊर्जा केवल उन साधनों को बनाने में ही खर्च नहीं करनी चाहिए बल्कि उनके लिए संस्कार गढ़ने चाहिए जिनके लिए हम ये साधन जुटा रहे हैं। यदि हम आने वाली पीढ़ी के लिए एक आदर्श बनकर उन्हें अच्छे संस्कार देंगे तो वही संस्कार भविष्य में हमें वास्तविक सुख और मानसिक शांति प्रदान करेंगे। शांति मिलने पर सुख का अनुभव स्वयं होने लगता है इसलिए संसाधनों के बजाय संस्कारों पर ध्यान केंद्रित करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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