सर्दियों का मौसम ठंडी हवा, कोहरा और बढ़ते वायु प्रदूषण के साथ आता है। इस दौरान कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न, खांसी, घरघराहट और जल्दी थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह परेशानी खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा, एलर्जी, हृदय रोग तथा पहले से श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों में अधिक देखने को मिलती है।
ठंड के मौसम में सांस की समस्या बढ़ने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण होते हैं, जिन्हें समझना और समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
ठंड में सांस की परेशानी बढ़ने के प्रमुख कारण
ठंडी और सूखी हवा में सांस लेने से फेफड़ों की नलियाँ सिकुड़ जाती हैं, जिससे हवा का प्रवाह बाधित होता है और सांस फूलने लगती है। यही कारण है कि अस्थमा के मरीजों को सर्दियों में अधिक समस्या होती है।
कोहरा और वायु प्रदूषण हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ा देते हैं। ये कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंचकर सूजन पैदा करते हैं, जिससे खांसी, बलगम और सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है।
सर्दियों में धूप कम मिलने से शरीर में विटामिन-D की कमी हो सकती है। विटामिन-D न केवल हड्डियों बल्कि इम्युनिटी के लिए भी आवश्यक है। इसकी कमी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और सर्दी-जुकाम व श्वसन संक्रमण जल्दी हो जाते हैं।
ठंड में प्यास कम लगने के कारण लोग पानी कम पीते हैं, जिससे बलगम गाढ़ा हो जाता है और सांस की नलियों में जमकर परेशानी पैदा करता है। इसके अलावा बंद कमरों में हीटर, अंगीठी या अन्य ईंधन जलाने से निकलने वाला धुआँ भी सांस की समस्या को बढ़ा सकता है। पर्याप्त वेंटिलेशन न होने पर घुटन और ऑक्सीजन की कमी महसूस होती है।
सांस की सेहत के लिए सही आहार
सर्दियों में ऐसा आहार लेना चाहिए जो शरीर को गर्म रखे, इम्युनिटी बढ़ाए और फेफड़ों को मजबूत बनाए।
अदरक, लहसुन, हल्दी और काली मिर्च जैसे मसाले सूजन कम करने और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। हल्दी वाला गुनगुना दूध सर्दी-खांसी और सांस की परेशानी में लाभकारी माना जाता है।
विटामिन-C से भरपूर फल जैसे आंवला, संतरा, अमरूद और नींबू फेफड़ों को संक्रमण से बचाने में सहायक होते हैं। मौसमी सब्जियाँ—गाजर, पालक, मेथी, चुकंदर और शलजम—शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं।
बादाम, अखरोट और मूंगफली जैसे मेवे ओमेगा-फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो फेफड़ों की सूजन कम करने में मदद करते हैं। गुनगुना पानी, सूप और हर्बल काढ़ा पीने से बलगम पतला होता है और सांस लेना आसान होता है। तुलसी, अदरक और दालचीनी से बना काढ़ा गले और फेफड़ों को राहत देता है।
वहीं बहुत ठंडी चीजें, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम और अत्यधिक तली-भुनी चीजों से बचना चाहिए, क्योंकि ये बलगम बढ़ाकर सांस की परेशानी को बढ़ा सकती हैं।
जरूरी सावधानियाँ अपनाएँ
ठंडी हवा में बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें, ताकि ठंडी हवा सीधे फेफड़ों में न जाए। सुबह बहुत जल्दी, खासकर कोहरे और प्रदूषण के समय बाहर टहलने से बचें। बेहतर है कि धूप निकलने के बाद ही बाहर जाएँ।
घर में धूप आने दें और कमरों में हवा के आवागमन का विशेष ध्यान रखें। धूम्रपान और धुएँ के संपर्क से पूरी तरह बचें। हीटर या अंगीठी का उपयोग करते समय कमरे में वेंटिलेशन अवश्य रखें।
रोजाना हल्की शारीरिक गतिविधि, टहलना, स्ट्रेचिंग और गहरी सांस लेने के अभ्यास फेफड़ों की क्षमता को बेहतर बनाते हैं। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम भी सांस की समस्या में सहायक हो सकते हैं।
पर्याप्त नींद, तनावमुक्त जीवनशैली और स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है। भीड़भाड़ से बचें और सर्दी-खांसी से पीड़ित लोगों से उचित दूरी बनाए रखें।
कब डॉक्टर से संपर्क करें
यदि लगातार सांस फूलना, सीने में दर्द, होंठों का नीला पड़ना, तेज बुखार या अत्यधिक खांसी की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। स्वयं दवा लेने से बचें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।
सही खान-पान, संतुलित दिनचर्या और थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर ठंड के मौसम में भी सांस की तकलीफ से काफी हद तक बचा जा सकता है। सर्दी का मौसम तभी आनंददायक बनता है, जब हम अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। आहार एवं पोषण से संबंधित व्यक्तिगत सलाह के लिए योग्य एवं पंजीकृत डाइटीशियन/न्यूट्रिशनिस्ट से ही संपर्क करें।
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