सरसों का तेल सर्दियों का नेचुरल मॉइस्चराइजर, रूखी त्वचा से दिलाए राहत
नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही हमारी त्वचा सबसे पहले इसका असर दिखाने लगती है। ठंडी हवा, कम धूप, गर्म पानी से नहाना और नमी की कमी, ये सभी मिलकर स्किन को रूखा, बेजान और खिंचा-खिंचा सा बना देते हैं।
सरसों का तेल गाढ़ा होता है और इसमें विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जब इसे हल्के हाथों से त्वचा पर लगाया जाता है, तो यह स्किन की गहराई तक जाकर नमी को लॉक करता है। आयुर्वेद मानता है कि नियमित तेल मालिश से त्वचा की कोशिकाएं मजबूत होती हैं, जबकि विज्ञान के अनुसार यह स्किन बैरियर को सुधारने में मदद करता है। सरसों का तेल बढ़ती उम्र के असर को कम करने में भी सहायक माना जाता है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। फ्री रेडिकल्स ही वो तत्व होते हैं, जिनकी वजह से झुर्रियां और फाइन लाइन्स जल्दी दिखने लगती हैं। आयुर्वेद में इसे त्वचा को जवान बनाए रखने वाला तेल माना गया है, जबकि वैज्ञानिक तौर पर यह स्किन की इलास्टिसिटी बनाए रखने में मदद करता है।
सर्दियों में खुजली, लालपन और छोटे-मोटे स्किन इन्फेक्शन भी आम समस्या बन जाते हैं। सरसों के तेल में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। नियमित रूप से हल्की मात्रा में लगाने से त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस पनपने की संभावना कम होती है। सर्दियों में धूप की वजह से त्वचा डल और काली पड़ सकती है। आयुर्वेद में मान्यता है कि सरसों का तेल रक्त संचार को बेहतर करता है। जब चेहरे या शरीर पर हल्की मालिश की जाती है, तो खून का बहाव बढ़ता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। विज्ञान भी मानता है कि बेहतर ब्लड सर्कुलेशन से स्किन सेल्स को ज्यादा पोषण मिलता है।
