मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का विशेष महत्व क्यों है? आयुर्वेद में छिपा है इसका राज
नई दिल्ली। 14 जनवरी को देशभर के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न पारंपरिक तरीकों से मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ के सेवन का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि खगोलीय घटना है, जिसका असर पूरे ब्रह्मांड पर पड़ता है।
इन सभी भोजन की तासीर गर्म होती है। मकर संक्रांति में मौसम के दौरान शरीर में वात दोष की वृद्धि होती है, जोड़ों और मांसपेशियों में जकड़न और ऐंठन होने लगती है, पाचन अग्नि धीमी हो जाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है। आयुर्वेद में इन सभी परेशानियों से बचने के लिए तिल और गुड़ को चुना गया है। तिल और गुड़ का सेवन शरीर में गर्मी और ऊर्जा लाता है, सर्दियों में होने वाले रूखेपन से बचाता है, और वात को संतुलित कर ऊर्जा देने का काम करता है। गुड़ में भरपूर मात्रा में आयरन है, जो सर्दियों में शरीर में रक्त की कमी नहीं होने देता है और शरीर को ऊर्जा देने में भी मदद करता है। आयुर्वेद में मकर संक्रांति पर तिल खाने से लेकर लगाने तक की सलाह दी जाती है। तिल के तेल से सर्दियों में जोड़ों की मालिश करनी चाहिए, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को। ये शरीर को सर्दी से बचाता है और गहराई से पोषण देकर मांसपेशियों को मजबूती देता है।
