प्राचीन सिद्धपीठ देवी मंदिर के वार्षिक मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई हाजिरी
मुज़फ्फरनगर- काली नदी के तट पर स्थित शहर के सबसे प्राचीन सिद्धपीठ देवी मंदिर के वार्षिक उत्सव मेले में सुबह से ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हज़ारों श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर मां शाकंभरी और मां बाला सुंदरी की संयुक्त पीठ पर हलवा-पूरी, छत्र, नारियल और श्रृंगार का सामान चढ़ाकर मन्नतें मांगी।
भक्तों का उमड़ा जनसैलाब मेले के अवसर पर सुबह से ही महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की भारी भीड़ मंदिर पहुंचने लगी थी। मंदिर समिति ने भवन पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। इस दौरान भक्तों को वार्षिक 'चमत्कारिक भभूत' का भी वितरण किया गया। मान्यता है कि इस भभूत के प्रयोग और माता की कृपा से श्रद्धालुओं को सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। नदी के घाट पर पीछे की ओर स्थित छड़ी की भी श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की।
ये भी पढ़ें ट्रंप की ट्रेड प्रतिबंध की चेतावनी के बाद झुका स्पेन, अमेरिकी सेना के सहयोग के लिए दी मंजूरीप्राचीन परंपरा का निर्वहन मंदिर समिति के मुख्य सेवक संजय कुमार ने बताया कि यूं तो सिद्धपीठ में पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, विशेषकर हर माह की अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी के अलावा नवरात्रों में यहां विशेष पूजा अनुष्ठान होते हैं। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल से चला आ रहा यह भव्य मेला पहले तीन दिन तक आयोजित होता था, जो समय के साथ अब एक दिवसीय रह गया है। मान्यता है कि होली के बाद वर्ष में एक बार जो भी श्रद्धालु यहां आकर प्रसाद चढ़ाता है, माता उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करती हैं।
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कुलदीप सिंह वर्ष 2003 से निरंतर रॉयल बुलेटिन संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं। पिछले दो दशकों से अधिक समय से वह संस्थान की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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