नई दिल्ली: खरीफ फसलों के MSP पर मंथन, भाकियू अराजनैतिक ने उठाई एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की मांग
C-2 लागत पर 100% मुनाफे और बाजार हस्तक्षेप योजना को मजबूत करने का दिया सुझाव; दिल्ली में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के साथ हुई किसान संगठनों की अहम बैठक
मुजफ्फरनगर/नई दिल्ली। खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारण को लेकर मंगलवार को नई दिल्ली में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की विभिन्न किसान संगठनों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) और पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। किसान नेताओं ने एमएसपी को कानूनी दर्जा देने, वास्तविक लागत (C-2) पर 100 प्रतिशत मुनाफा जोड़ने और आयात-निर्यात नीति को किसानों के अनुकूल बनाने की पुरजोर वकालत की।
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक बालियान ने बैठक में तर्क दिया कि एमएसपी केवल लागत का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आर्थिक स्थिरता से जुड़ा है। उन्होंने सुझाव दिया कि फसलों के जोखिम और बाजार की अस्थिरता को देखते हुए किसानों का मुनाफा 50 से लेकर 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बालियान ने सी-2 लागत और कटाई के बाद के खर्चों (डी) को भी मूल्य निर्धारण का आधार बनाने की मांग की।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: वैश्य समाज की एकजुटता पर जोर: अखिल भारतीय वैश्य महासंगठन ने घोषित की जिला कार्यकारिणीआयात-निर्यात नीति से किसानों को हो रहा नुकसान: धर्मेंद्र मलिक भाकियू (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने वर्तमान व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए कहा कि किसानों को घोषित एमएसपी भी नसीब नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में उत्तर प्रदेश में धान 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका, जो एमएसपी से काफी कम है। मलिक ने कहा कि जब विदेशों से सस्ता खाद्य तेल और दालें आयात की जाती हैं, तो उसका सीधा असर घरेलू किसानों के दामों पर पड़ता है। उन्होंने मांग की कि एमएसपी वृद्धि को थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से जोड़ा जाए और खरीद के 24 घंटे के भीतर किसानों का भुगतान सुनिश्चित हो।
बैठक में रखे गए मुख्य सुझाव:
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कानूनी गारंटी: एमएसपी को कानूनी संरक्षण मिले ताकि उससे कम पर खरीद दंडनीय हो।
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लागत और लाभ: सी-2 लागत में 100 प्रतिशत लाभ जोड़कर मूल्य तय किया जाए।
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संसाधन: खरीद केंद्रों पर फसल सुखाने के लिए ड्रायर, बड़े पंखे और इलेक्ट्रॉनिक कांटे अनिवार्य हों।
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विविधीकरण: चावल और गेहूं के अलावा अन्य फसलों को भी एमएसपी के प्रभावी दायरे में लाया जाए।
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आंकड़ों का आधार: जिस राज्य में मजदूरी और जमीन का किराया सबसे अधिक हो, उसे ही राष्ट्रीय आधार माना जाए।
बैठक में सीएसीपी के अध्यक्ष विजय पॉल शर्मा, सचिव सिरीक जॉर्ज, सदस्य प्रेम चंद सहित भारतीय किसान सभा और भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। किसान नेताओं ने सरकार की इस संवाद पहल को सकारात्मक बताया।
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मुज़फ्फरनगर के वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप त्यागी पिछले दो दशकों (20 वर्ष) से रॉयल बुलेटिन परिवार के एक अटूट और विश्वसनीय स्तंभ हैं। दो दशकों के अपने इस लंबे सफर में आपने मुज़फ्फरनगर की हर छोटी-बड़ी राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलचल को बेहद करीब से देखा और अपनी लेखनी से जनता की आवाज़ बुलंद की है। वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में जिला प्रभारी की ज़िम्मेदारी निभा रहे श्री त्यागी अपनी ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए पूरे जिले में पहचाने जाते हैं। जिले की खबरों, जन-समस्याओं और संवाद हेतु आप उनसे मोबाइल नंबर 9027803022 पर संपर्क कर सकते हैं।

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