कोतवाल के नेतृव में कैराना से पानीपत हाइवे पर सरपट दौड़ रहे हैं डग्गामार वाहन
कैराना। कैराना पानीपत मार्ग पर पुलिस की देख रेख में दिनभर में पांच दर्जन से अधिक सरपट हाईवे पर दौड़ रहे डग्गामार वाहन। इन वाहनों से कई परिवार की खुशियां छीन गई है। लेकिन हादसों के बाद भी कोतवाली पुलिस के संरक्षण में संचालित है लगभग पांच दर्जन से अधिक वाहन। आखिर क्यों नहीं लग […]
कैराना। कैराना पानीपत मार्ग पर पुलिस की देख रेख में दिनभर में पांच दर्जन से अधिक सरपट हाईवे पर दौड़ रहे डग्गामार वाहन। इन वाहनों से कई परिवार की खुशियां छीन गई है। लेकिन हादसों के बाद भी कोतवाली पुलिस के संरक्षण में संचालित है लगभग पांच दर्जन से अधिक वाहन।
आखिर क्यों नहीं लग पाता अंकुश ?
ये भी पढ़ें शामली में महाशिवरात्रि से पूर्व कांवड़ियों का सैलाब, शिवालयों में सजावट और सुरक्षा व्यवस्थानगर के मुख्य मार्ग पर कोतवाली के समीप सड़क पर स्थित पालिका बाजार व कांधला तिराहे पर मुख्यमार्ग से डग्गामार वाहनों का संचालन किया जाता है। यह क्षेत्र कोतवाली पुलिस के अंतर्गत किला गेट चौकी व इमामगेट चौकी क्षेत्र में मौजूद है। पूर्व में सड़क हादसे में ये वाहन कई परिवारों की खुशियां छीन चुके है। हादसों के बड़े कारणों में सड़कों पर अनफिट और खटारा वाहनों का परिचालन प्रमुख
है। कोतवाली पुलिस की देख रेख में सड़क पर डग्गामार वाहन सरपट दौड़ रहे हैं। इनके परिचालन पर रोक लगाने के लिए प्रशासनिक पहल सिफर है। सूत्र बताते है कि हाइवे पर दौड़ने वाले वाहनों की संख्या 60 से अधिक है। जिनसे कोतवाली पुलिस 1500 से 2000 के बीच प्रति वाहन से महीना वसूलती है। यह सब पैसा एकत्र होकर कोतवाल को दिया जाता है। फिर भला कार्रवाई करेगा कौन ओर वाहनों पर रोक लगेगी कैसे।
मुख्यमार्ग पर मौजूद अतिक्रमण पर होती है कार्रवाई, वाहनों पर नहीं
ये भी पढ़ें बेटियों के हाथ होंगे पीले, सरकार देगी 20 हजार: शामली में शादी अनुदान योजना के लिए आवेदन शुरूनगर के मुख्यमार्ग पर मौजूद अतिक्रमण पर कार्रवाई करने को कोतवाल व्यापारियों को चेतावनी देते है। मार्ग को अवरुद्ध कर डग्गामार वाहनों का खुलेआम संचालन होता है। लेकिन यह किसी को दिखाई नहीं देते है। भला दिखाई भी कैसे दे जब कोतवाल को लाखों रुपये महीना इन वाहनों से अवैध वसूल कर दिया जाता है।
मुख्यमंत्री के आदेश हुए धराशायी
गत छह माह पूर्व योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने आदेश जारी किए थे कि चोराहे व सड़कों के किनारे कोई वाहन नहीं खड़े होंगे। जिसके चलते सभी बस स्टैंड भी पुलिस प्रशासन ने बैठक कर अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किए थे। लेकिन इन वाहनों को भला कौन हटवाए जब यह कोतवाल के संरक्षण में संचालित है।
कोतवाल को जाता है महीना तो काहे का घबराना
कोतवाली, किला गेट, इमामगेट, पंजीठ व यमुना ब्रिज चौकी क्षेत्र से सभी वाहनों का परिचालन होता है। वाहनों में लाइटिंग व यातायात नियमों को दर्शाने वाली रिफ्लेक्टिग व धुआं उगलते वाहन प्रदूषण व अन्य कागजात पूरे नहीं होने के कारण भी यह वाहन दौड़ते नजर आते है। जो आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। भला जब कोतवाली के मुखिया के संरक्षण में वाहनों का संचालन है तो भला चौकी इंचार्ज कार्रवाई करने की हिम्मत कैसे जुटाए।
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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