कैराना में सट्टा अधिनियम में निर्दोष पर कार्रवाई करने पर दरोगा लाइन हाजिर
कैराना। बिना नाम तस्दीक किए निर्दोष के खिलाफ सट्टा अधिनियम में कार्रवाई करने के मामले में दरोगा पर गाज गिरी है,जिसे लाइन हाजिर कर दिया गया है। गत पंद्रह फरवरी को कोतवाली पुलिस ने नगर के मोहल्ला आलकला में दबिश देकर एक चर्चित सट्टा एजेंट को गिरफ्तार किया था।पुलिस पूछताछ में पकड़े गए युवक ने […]
कैराना। बिना नाम तस्दीक किए निर्दोष के खिलाफ सट्टा अधिनियम में कार्रवाई करने के मामले में दरोगा पर गाज गिरी है,जिसे लाइन हाजिर कर दिया गया है।
गत पंद्रह फरवरी को कोतवाली पुलिस ने नगर के मोहल्ला आलकला में दबिश देकर एक चर्चित सट्टा एजेंट को गिरफ्तार किया था।पुलिस पूछताछ में पकड़े गए युवक ने अपने नाम को छुपाते हुए अपने सगे भाई यूनुस का नाम लिया था,जिसके बाद पुलिस ने रात्रि में ही बिना नाम तस्दीक किए शाहनवाज की जगह सौ किलो मीटर दूर मजदूरी के लिए गए उसके सगे भाई यूनुस के खिलाफ सट्टा अधिनियम 13 जी के तहत कारवाई की थी और उसे कोतवाली से ही जमानत भी दे दी गई थी। इस पूरे खेल में कहीं न कहीं पुलिस ने बड़ा खेल किया है,जिस कारण सट्टा एजेंट बच निकला है।
आश्चर्य की बात यह है कि जानकारी होने के बाद भी शाहनवाज की जगह पुलिस ने यूनुस के नाम के ही हस्ताक्षर कराए और सौ किलो मीटर बैठे निर्दोष को आरोपी बना दिया गया। सीओ अमरदीप कुमार मौर्य ने बताया कि एसएसपी को रिपोर्ट भेजी गई थी। एसएसपी ने कार्रवाई कर कोतवाली में तैनात उपनिरीक्षक मुकेश दिनकर को लाइनहाजिर किया गया है।
लालच के खेल में खाकी हुई बदनाम
पुलिस जिस सट्टा एजेंट को उठाकर कोतवाली लाई थी उसी ने पुलिस की किरकिरी करा दी है। चालाकी से अपने भाई का नाम बताने वाला शातिर युवक खुद बच निकला,लेकिन भाई को आरोपी बनवा गया। पुलिस ने जानकारी होते हुए भी जिस लापरवाही से काम लिया उसकी मिसाल कम ही देखने को मिलती है। सब कुछ जानते हुए भी पुलिस ने लालच के हवस में खेल कर दिया।
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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