वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में डिजिटल क्रांति को झटका? समर्थ पोर्टल छोड़ वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने पर गहराया विवाद
क्या है समर्थ पोर्टल और पूर्वांचल विवि में विरोध का कारण?
जौनपुर। यूपी के जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में प्रायोगिक परीक्षाओं की अंक अपलोडिंग व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शासनादेश के तहत विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कार्य ‘समर्थ पोर्टल’ के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। चालू सत्र में परीक्षा फॉर्म भरने सहित कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं इसी पोर्टल के जरिए संपन्न कराई गईं।वही इस मामले में रविवार को जानकारी लेने पर कुलसचिव केश लाल ने कहाविश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रथम सेमेस्टर के सेशनल एवं वोकेशनल अंकों की अपलोडिंग समर्थ पोर्टल से ही की जाएगी, जबकि अन्य सेमेस्टरों के अंक पूर्व निर्धारित (पुरानी) पद्धति से जमा होंगे।
प्रथम सेमेस्टर को छोड़कर अन्य कक्षाओं में प्रायोगिक परीक्षकों की नियुक्ति कर उन्हें महाविद्यालयों में भेजा जा रहा है, जहां वे पारंपरिक व्यवस्था के तहत प्रयोगात्मक व सेशनल अंक अपलोड करेंगे। इसके बाद ही परीक्षा परिणाम जारी किए जाएंगे। प्रक्रिया में इस बदलाव से छात्र-छात्राओं में असमंजस और नाराजगी का माहौल है। उनका कहना है कि जब अधिकांश शैक्षणिक कार्य डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं, तो सभी सेमेस्टरों की अंक अपलोडिंग भी एक समान पोर्टल के जरिए होनी चाहिए। छात्रों का आरोप है कि कुछ महाविद्यालयों में बाहरी परीक्षकों की नियुक्ति के नाम पर अतिरिक्त धन की मांग की जा रही है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।छात्रों ने शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि प्रायोगिक परीक्षाओं की अंक अपलोडिंग के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और एकरूप डिजिटल व्यवस्था लागू की जाए, ताकि भ्रम और अनावश्यक आर्थिक दबाव की स्थिति समाप्त हो सके।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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