बागपत: न्यायिक जागरूकता, संविधान पार्क और ‘Beyond The Wall’ पहल का शुभारंभ
बागपत। जिला न्यायालय, बागपत परिसर में न्यायिक जागरूकता, सामाजिक सुधार और संवैधानिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक आयोजन का साक्षी बना। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (नालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ के मुख्य आतिथ्य में यहां “Community Mediation: Towards a Litigation-Free Rural India” पायलट परियोजना का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर नालसा के सदस्य संजीव पांडेय, नालसा के निदेशक कुणाल वेपा, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, पैरा लीगल वालंटियर और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रिचा द्वारा किया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि न्याय को समाज के और करीब लाने, संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक व्यापक पहल के रूप में सामने आया।
इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने “Community Mediation: Towards a Litigation-Free Rural India” परियोजना का विधिवत शुभारंभ किया। इस परियोजना के तहत बागपत जनपद के छह गांवों को चयनित किया गया है, जहां अब छोटे-छोटे विवाद अदालत में जाने से पहले ही समुदाय स्तर पर मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य गांवों में आपसी संवाद और समझ के माध्यम से विवादों को समय रहते सुलझाना है, ताकि अदालतों में मुकदमों की संख्या कम हो और समाज में सौहार्द बना रहे। जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि गांवों में होने वाले पारिवारिक विवाद, जमीन से जुड़े मतभेद और पड़ोसियों के बीच होने वाले झगड़े यदि समय रहते बातचीत और समझ के माध्यम से सुलझा लिए जाएं, तो इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि सामाजिक संबंध भी मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि Mediation Act, 2023 के तहत मध्यस्थता को कानूनी मान्यता दी गई है और यह पहल भारत की उस पुरानी परंपरा को मजबूत करती है, जिसमें समाज के सम्मानित लोग बैठकर विवादों का समाधान करते थे।
गांवों में निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में कार्य कर सकें
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत गांवों के सम्मानित और जागरूक व्यक्तियों जैसे सेवानिवृत्त शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ नागरिक और अन्य जिम्मेदार नागरिकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें संवाद, मध्यस्थता, निष्पक्षता और विवाद समाधान के आधुनिक तरीकों से प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे गांवों में निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में कार्य कर सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल समाज में विश्वास और सहयोग की भावना को मजबूत करेगी और बागपत में शुरू हुआ यह पायलट प्रोजेक्ट आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक मॉडल बनेगा। उन्होंने कहा कि नालसा का उद्देश्य न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है और यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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संविधान की प्रस्तावना का अनावरण
इस अवसर पर जिला न्यायालय परिसर में स्थापित संविधान पार्क का भी भव्य उद्घाटन किया गया। नालसा के सदस्य संजीव पांडेय ने संविधान की प्रतिकृति और “हम भारत के लोग” से शुरू होने वाली संविधान की प्रस्तावना का अनावरण किया। 11 फीट ऊँचाई और 14 फीट चौड़ाई वाली यह संरचना न केवल आकार में भव्य है बल्कि अपने संदेश में भी अत्यंत प्रभावशाली है। लगभग 600 किलोग्राम वजनी यह प्रतिकृति रिसाइकल्ड मटीरियल से निर्मित है जो पर्यावरणीय जिम्मेदारी का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है। जैसे ही संविधान की प्रस्तावना का अनावरण हुआ, वहां उपस्थित लोगों ने संविधान के प्रति सम्मान और गर्व का भाव व्यक्त किया। संविधान पार्क का उद्देश्य नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना और संविधान के मूल्यों को समाज में स्थापित करना है। संजीव पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान देश की आत्मा है और यह हर नागरिक को समान अधिकार और जिम्मेदारी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि संविधान पार्क के माध्यम से न्यायालय आने वाले लोग संविधान के मूल्यों को समझ सकेंगे और अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बागपत कारागार के बंदियों ने तैयार किया Beyond The Wall
कार्यक्रम का एक और महत्वपूर्ण आकर्षण बागपत कारागार प्रशासन द्वारा शुरू किए गए विशेष ब्रांड ‘Beyond The Wall’ का शुभारंभ रहा। इस पहल के तहत जेल में बंद बंदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को एक नई पहचान दी गई है। इस अवसर पर जिला न्यायालय परिसर में बंदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई, जिसका उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने किया। इस प्रदर्शनी में बंदियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें वेस्ट पॉलीथीन से बनी आकर्षक रेज़िन घड़ियां, पौष्टिक मोरिंगा लड्डू और मोरिंगा बर्फी, बागपत की प्रसिद्ध दूध बर्फी, क्रोशिया से बने मफलर और कैप, मंदिरों के सूखे फूलों से बनी अगरबत्ती, कपड़े के थैले और सुंदर हस्तनिर्मित पेंटिंग शामिल हैं। इन उत्पादों को बंदियों ने जेल परिसर के भीतर पेशेवर प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में तैयार किया है।
इस पहल का उद्देश्य बंदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें सुधार, कौशल और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे सजा पूरी होने के बाद समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। ‘Beyond The Wall’ पहल बंदियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल ने यह संदेश दिया कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर हर व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है। बंदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को देखकर उपस्थित लोगों ने उनकी सराहना की और इसे एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल बताया।
कार्यक्रम के अंत में जिला न्यायालय परिसर में वाटर कियोस्क का भी उद्घाटन किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से अब न्यायालय में आने वाले वादकारियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को स्वच्छ और ठंडा पेयजल आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोग, बुजुर्ग और महिलाएं अब पानी के लिए परेशान नहीं होंगी। यह सुविधा न्यायालय परिसर में जनसेवा और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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जिला न्यायालय, बागपत में आयोजित यह आयोजन न्यायिक सुधार, संवैधानिक जागरूकता और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आया। एक ओर जहां गांवों में मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने की पहल शुरू हुई है, वहीं संविधान पार्क नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करेगा और ‘Beyond The Wall’ पहल बंदियों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है। इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के भीतर संवाद, जागरूकता और सुधार के माध्यम से भी न्याय स्थापित किया जा सकता है। बागपत में शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है और न्याय को समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लक्ष्य को मजबूत करेगी।
इस अवसर पर जिला न्यायाधीश मनोज कुमार, जिलाधिकारी अस्मिता लाल पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय, सालसा की सदस्य सचिव डॉ मनु कालिया विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य अंकिता सिंह सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।
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