बागपत का पुरा महादेव मेला 2026: आस्था, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम
बागपत। आस्था, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के अद्भुत संगम का साक्षी बनने जा रहा जनपद बागपत का ऐतिहासिक पुरा महादेव मेला इस बार एक नई पहचान गढ़ने जा रहा है। फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि पर आयोजित होने वाले श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर के इस प्रसिद्ध मेले को इस वर्ष पहली बार “जीरो वेस्ट महोत्सव” के रूप में आयोजित किया जा रहा है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल की दूरदर्शी पहल और प्रशासन की व्यापक तैयारियों के चलते यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का भी एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत करेगा। वहीं कांवड़ यात्रा को डिजिटल रूप देने के लिए कांवड़ यात्रा एप लॉन्च किया गया है जो श्रद्धालुओं का सारथी बनेगा।
इस ऐतिहासिक तीन दिवसीय मेले का आयोजन 14 से 16 फरवरी 2026 तक किया जाएगा, जिसमें झंडारोहण 15 फरवरी 2026 को शाम 5:02 बजे संपन्न होगा। इस दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और “हर हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष के साथ बागपत का पुरा महादेव मंदिर एक बार फिर अपनी दिव्य और विराट आभा से पूरे जनपद को भक्तिमय और आलोकित कर देगा।
प्रदेश के लिए मिसाल बनने जा रहे इस आयोजन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मेरठ मंडलायुक्त भानू चंद्र गोस्वामी और डीआईजी कलानिधि नैथानी ने पुरा महादेव मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा, स्वच्छता, बिजली, जल आपूर्ति, भीड़ प्रबंधन और जीरो वेस्ट मॉडल से जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने मंदिर परिसर में लगाए गए बैरिकेडिंग, श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेले में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण मिले और किसी भी स्तर पर अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सेवा का अवसर है, जिसे सभी अधिकारी सेवाभाव और श्रद्धा के साथ निभाएं।
मंडलायुक्त एवं डीआईजी ने मंदिर परिसर में जलाभिषेक कर भगवान शिव से जनपद की सुख-समृद्धि की कामना भी की। उन्होंने कहा कि पुरा महादेव मंदिर न केवल बागपत बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बार मेले की सबसे बड़ी विशेषता इसे “जीरो वेस्ट महोत्सव” के रूप में विकसित करना है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में प्रशासन ने इस मेले को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाने का संकल्प लिया है। इसके तहत मेला परिसर में वेस्ट टू वेल्थ आधारित कई अभिनव मॉडल स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य कचरे को संसाधन में बदलना और श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इसमें सहयोग के लिए पिंक टीशर्ट-कैप में स्वयंसेवक तैनात रहेंगे।
इसी क्रम में मंदिर परिसर में आज सोलर ड्रायर फैसिलिटी का मंडलायुक्त और डीआईजी ने शुभारंभ किया। इस आधुनिक सुविधा के माध्यम से मंदिर में चढ़ाए जाने वाले फूल, माला और अन्य जैविक अपशिष्ट को सुखाकर उनका उपयोग अगरबत्ती, धूपबत्ती और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने में किया जाएगा। इससे न केवल कचरे का प्रभावी निस्तारण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इस सुविधा की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल पर मेला परिसर में “ड्रॉप ए प्लास्टिक, गेट ए क्लॉथ बैग” जैसे अभिनव मॉडल भी लागू किए गए हैं। इसके तहत श्रद्धालु प्लास्टिक की बोतल या कचरा निर्धारित मशीन में जमा कर कपड़े का थैला प्राप्त कर सकेंगे। इसका उद्देश्य प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित करना और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना है।
मेला क्षेत्र को नगर विकास विभाग द्वारा 9 सेक्टर में विभाजित किया गया है, ताकि सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित की जा सके। प्रत्येक सेक्टर में एक सुपरवाइजर और सफाई कर्मचारियों की टीम तैनात की गई है। कुल 9 सुपरवाइजर और 84 सफाई कर्मचारी मेले के दौरान 24 घंटे सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहेंगे। इसके अलावा 78 कूड़ेदान विभिन्न स्थानों पर लगाए गए हैं और कचरा संग्रहण के लिए विशेष वाहन भी तैनात किए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि मेला समाप्त होने के बाद भी परिसर पूरी तरह स्वच्छ रहे और कहीं भी कचरे का ढेर दिखाई न दे। इसके लिए कचरे का पृथक्करण, संग्रहण और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। जैविक कचरे से खाद और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाए जाएंगे, जबकि प्लास्टिक और अन्य कचरे को रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा। पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मेला परिसर में 9 पानी के टैंकर लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल आसानी से उपलब्ध हो सके। इसके अलावा 9 मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था भी की गई है, जिनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल और पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने मेले में तैनात जोनल मजिस्ट्रेट, सेक्टर मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत ब्रीफिंग दी। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे संवेदनशीलता और सेवाभाव के साथ अपनी ड्यूटी का निर्वहन करें और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने दें। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन के लिए सौभाग्य की बात है कि उन्हें श्रद्धालुओं की सेवा का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी अधिकारी अपना ड्यूटी पॉइंट तब तक नहीं छोड़ेगा, जब तक उसका प्रतिस्थानी वहां उपस्थित न हो जाए। सभी अधिकारियों को अपने तैनाती क्षेत्र, मार्गों और संपर्क सूत्रों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। अधिकारियों को अपने वाहनों में पानी, प्राथमिक उपचार सामग्री और आवश्यक दवाइयां रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं इस बार सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक भी मौके पर तैनात किए गए है।
जिलाधिकारी ने खाद्य सुरक्षा और दुकानों की व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि मेला परिसर में लगने वाली सभी दुकानों का सत्यापन किया जाए और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक दुकान पर रेट लिस्ट प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा और ओवररेटिंग की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मेला परिसर में प्राथमिक उपचार केंद्र, एंबुलेंस और मेडिकल टीम तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक योजना बनाई गई है। मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं, ताकि भीड़ का दबाव कम किया जा सके। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग, साइनेज बोर्ड और सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को मार्ग और सुविधाओं की जानकारी आसानी से मिल सके।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल स्वयं मेले की तैयारियों की नियमित निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पुरा महादेव मेला जनपद की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं, दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों से अपील की कि वे स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें और प्लास्टिक के उपयोग से बचें। उन्होंने कहा कि भगवान शिव प्रकृति के अधिपति हैं और उनकी आराधना तभी पूर्ण होगी जब हम प्रकृति की रक्षा भी सुनिश्चित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनपद बागपत का यह जीरो वेस्ट मेला प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनेगा।
इस दौरान अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व विनीत उपाध्याय, अपर पुलिस अधीक्षक प्रवीण चौहान, सभी संबंधित जोनल एवं सेक्टर मजिस्ट्रेट, समस्त ईओ, एआरटीओ विपिन कुमार, आदि मौजूद रहे।
इसी तरह अपने आसपास और देश प्रदेश की खबरे, सबसे पहले पढ़ने के लिए रॉयल बुलेटिन की वेबसाइट www.royalbulletin.in से जुड़े और रॉयल बुलेटिन को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स पर फ़ॉलो और सब्सक्राइब करें। सभी के लिंक कमेंट के नीचे दिए गए है ।
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru

टिप्पणियां