ब्यूरोक्रेसी से पॉलिटिक्स तक.. बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने पीएम मोदी और अमित शाह को दी खुली चुनौती
देवरिया। समान न्याय संघर्ष समिति ने सोमवार को महारानी चंडिका छात्रावास परिसर में एक महा पंचायत का आयोजन किया। इस दौरान सामाजिक न्याय, शिक्षा व्यवस्था, आरक्षण नीति और संवैधानिक अधिकारों जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। महापंचायत में निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री भी शामिल हुए। उन्होंने वर्ष 2029 में होने वाली लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन और समान न्याय की लड़ाई का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि देश में शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर व्यापक संवाद और जनजागरण की आवश्यकता है। इस दौरान उन्होंने यूजीसी की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि वर्तमान नीतियां छात्रों और शिक्षण संस्थानों के हितों के अनुरूप नहीं हैं।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समान अवसर और शैक्षणिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने की मांग की। अलंकार अग्निहोत्री ने उपस्थित लोगों से इस संघर्ष में सहभागी बनने और आंदोलन को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया। अन्य वक्ताओं ने भी समिति के उद्देश्यों को विस्तार से बताते हुए कहा कि आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलाया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामाजिक न्याय, समान अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया ।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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