सहारनपुर में दहेज प्रथा पर करारा प्रहार, दूल्हे ने ठुकराए ₹21 लाख, कहा- 'शादी रिश्ता है, कोई सौदा नहीं', सब-इंस्पेक्टर पिता ने भी दिया बेटे के फैसले का साथ
सहारनपुर। जनपद के गागलहेड़ी क्षेत्र में एक विवाह समारोह उस समय ऐतिहासिक बन गया, जब दूल्हे ने दहेज के रूप में दिए जा रहे 21 लाख रुपये ससम्मान वापस लौटा दिए। 'दहेज रहित विवाह' का यह उत्कृष्ट उदाहरण गागलहेड़ी और छुटमलपुर के बीच देखने को मिला, जिसकी अब चहुंओर सराहना हो रही है। नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत दूल्हे प्रफुल्ल सोम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज है।"
मूल रूप से मेरठ के गांव कुसावली निवासी और वर्तमान में शामली के कैराना थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर यशपाल सिंह सोम के बेटे प्रफुल्ल सोम की बारात 14 फरवरी की रात कैलाशपुर स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आई थी। दुल्हन साक्षी राणा, जो स्वयं नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, उनके पिता रविंद्र सिंह राणा ने रस्मों के दौरान शगुन के तौर पर 21 लाख रुपये दूल्हे को भेंट किए।
"हम आत्मनिर्भर हैं, दहेज की जरूरत नहीं"
जैसे ही 21 लाख रुपये की रकम प्रफुल्ल की ओर बढ़ाई गई, उसने माइक थाम लिया और समारोह में मौजूद सभी मेहमानों को चौंका दिया। प्रफुल्ल ने कहा, "शादी दो परिवारों और दो दिलों का मिलन है, यह कोई सौदा नहीं है। हम दोनों आत्मनिर्भर हैं और इस पवित्र रिश्ते को लेन-देन का माध्यम नहीं बनने देंगे।" प्रफुल्ल के इस निर्णय पर उनके पिता यशपाल सिंह ने भी गर्व जताया। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में रहते हुए समाज को कानून का पाठ पढ़ाना उनका कर्तव्य है, और यदि वे खुद दहेज लेंगे तो दूसरों को कैसे रोकेंगे।
वधू पक्ष हुआ भावुक, समाज को दिया बड़ा संदेश
दूल्हे के इस साहसिक कदम को देखकर दुल्हन के पिता रविंद्र राणा और अन्य परिजन भावुक हो गए। मेहमानों ने खड़े होकर तालियों के साथ इस फैसले का स्वागत किया। दुल्हन साक्षी ने अपनी ससुराल पहुंचकर गर्व के साथ कहा, "मुझे खुशी है कि मैं ऐसे परिवार का हिस्सा बनी हूं जहां शिक्षा और संस्कारों को पैसों से ऊपर रखा गया।"
प्रफुल्ल सोम ने युवाओं से अपील की है कि वे दहेज के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि दहेज एक सामाजिक बुराई है जो बेटियों को बोझ समझने की गलत मानसिकता को बढ़ावा देती है। इस विवाह ने समाज को संदेश दिया है कि यदि नई पीढ़ी ठान ले, तो दहेज मुक्त समृद्ध समाज का निर्माण निश्चित है।
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लेखक के बारे में
गौरव सिंघल सहारनपुर के एक अनुभवी और प्रतिष्ठित पत्रकार हैं, जो पिछले 18 वर्षों (2007 से) से मीडिया जगत में सक्रिय हैं। पत्रकारिता की बारीकियां उन्होंने विरासत में अपने पिता के मार्गदर्शन में 'अमर उजाला' और 'हिन्दुस्तान' जैसे संस्थानों से सीखीं।
अपने लंबे करियर में उन्होंने इंडिया टुडे (फोटो जर्नलिस्ट), शुक्रवार, इतवार, दैनिक संवाद और यूपी बुलेटिन जैसे दर्जनों प्रतिष्ठित समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में अपनी सेवाएं दीं। लेखनी के साथ-साथ कुशल फोटो जर्नलिस्ट के रूप में भी उनकी विशिष्ट पहचान है।
विभिन्न राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में अनुभव प्राप्त करने के बाद, वर्तमान में गौरव सिंघल सहारनपुर से 'रॉयल बुलेटिन' के साथ जुड़कर अपनी निष्पक्ष और गहरी रिपोर्टिंग से संस्थान को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

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