नाबालिग का अपहरण करके दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने दोषी को सुनाई उम्रकैद की सजा
उरई। न्यायलय में विचाराधीन नाबालिग से दुष्कर्म व अपहरण के मामले में दोष सिद्ध होने के बाद शनिवार को न्यायधीश ने दाेषी को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 1 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रणकेंद्र सिंह भदौरिया व विश्वजीत सिंह गुर्जर ने बताया कि एट थाना क्षेत्र के एक ग्राम निवासी पिता ने थाना एट में 9 अप्रैल 2023 को लिखित सूचना दी थी। जिसमें बताया था कि अभियुक्त संजय वाल्मीकि निवासी ग्राम मलूपुरा कोतवाली उरई उसकी नाबालिग पुत्री को बीती 6 अप्रैल 2023 को भगा ले गया है। शिकायतकर्ता ने बताया था कि वह पत्नी के साथ गेहूं काटने गया था, तभी मौका पाकर संजय बाल्मीकि बेटी को ले गया। इस सूचना पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ नाबालिग के अपहरण और पॉक्साे एक्ट की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया था। मुकदमे के बाद पुलिस ने आरोपित संजय वाल्मीकि को गिरफ्तार कर लड़की को बरामद कर लिया था।
फिर उसका डॉक्टरी परीक्षण कराया तो नाबालिग लड़की गर्भवती पाई गई। बाद में घर वालों व अधिकारियों की सहमति पर नाबालिग लड़की का गर्भपात कराया गया। पुलिस ने आरोपित को अपहरण और दुष्कर्म सहित अन्य सुसंगत धाराओं में चालान करके न्यायालय में पेश किया था। वहां से उसे जेल भेज दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने विवेचना कर कई वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किये और पीड़िता सहित अन्य गवाहों के बयान दर्ज कराये थे। 8 जून 2023 को इस मामले में चार्जशीट दाखिल कराई गई थी। नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का मामला अपर जिला जज/स्पेशल जज पॉस्को कोर्ट मोहम्मद कमर की अदालत में विचाराधीन था। इस मामले में जज मोहम्मद कमर ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनी और सबूतों तथा गवाहों के आधार पर आरोपित को नाबालिग से दुष्कर्म व अपहरण में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 1 लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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