कानपुर में क्रिकेट के मैदान पर मातम: मधुमक्खियों के हमले में अंपायर की मौत, अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
"उठो न पापा..."— बेटी पिता का चेहरा पोंछती रही, श्मशान घाट पर हर आंख हुई नम
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक स्थानीय क्रिकेट मैच के दौरान हुई अनहोनी ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अंपायरिंग कर रहे शख्स पर मधुमक्खियों के झुंड ने इस कदर हमला किया कि अस्पताल पहुँचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। आज जब उनकी अर्थी उठी, तो पूरा इलाका गमगीन हो गया।
मैदान पर क्या हुआ?
मैच अपने रोमांच पर था, तभी अचानक कहीं से मधुमक्खियों का एक विशाल झुंड मैदान में आ गया। खिलाड़ी तो जमीन पर लेट गए, लेकिन अंपायर (नाम) इसकी चपेट में आ गए। दर्जनों मधुमक्खियों ने उन्हें बुरी तरह डंक मार दिया। आनन-फानन में उन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जहरीले डंकों के कारण उनके शरीर ने साथ छोड़ दिया।
अंतिम संस्कार का करुण दृश्य
आज जब अंपायर का पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान पहुँचा, तो चीख-पुकार मच गई।
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पत्नी का विलाप: पति की देह देख पत्नी बेसुध हो गई और चीख-चीख कर उन्हें जगाने की कोशिश करती रही।
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बेटी का साहस और दुख: मासूम बेटी बार-बार अपने पिता का चेहरा पोंछती रही, जैसे उसे यकीन ही न हो कि उसके पिता अब कभी नहीं उठेंगे।
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मुखाग्नि: भारी मन से परिजनों ने नम आंखों के बीच उन्हें मुखाग्नि दी। खेल के प्रति समर्पित एक व्यक्तित्व का अंत इस तरह होगा, किसी ने नहीं सोचा था।
खेल जगत में शोक
कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन और स्थानीय खिलाड़ियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। खिलाड़ियों का कहना है कि उन्होंने एक बेहतरीन मार्गदर्शक और निष्पक्ष अंपायर खो दिया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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