बिठूर में सजेगी सुरों की महफिल, गंगा किनारे दिखेगा देश की लोक कलाओं का संगम
कानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'दिव्य और भव्य' उत्तर प्रदेश के विजन को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक नगरी बिठूर एक बार फिर सज-धज कर तैयार है। आगामी 26 से 28 फरवरी तक आयोजित होने वाला 'बिठूर महोत्सव' इस बार न केवल कला और संस्कृति का केंद्र बनेगा, बल्कि योगी सरकार के 'विरासत भी, विकास भी' के संकल्प को भी दोहराएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में देश के नामचीन कलाकारों के साथ-साथ लोक संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिलेगी।
एडीएम सिटी राजेश कुमार ने बुधवार को बताया कि बिठूर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक मंच पर लाने के लिए इस महोत्सव को बेहद खास बनाया गया है। आयोजन की शुरुआत 26 फरवरी को स्कूली छात्र-छात्राओं की रंगोली, कला और स्लोगन प्रतियोगिताओं से होगी। शाम को मुख्यमंत्री के डिजिटल इंडिया मिशन की झलक के साथ 'बिठूर थीम गीत' का लोकार्पण होगा। इसके बाद भोपाल कत्थक समिति शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति देकर भारतीय परंपरा को जीवंत करेगी।
ये भी पढ़ें दिल्ली में फर्जी NIA अफसर गिरफ्तार, आई-कार्ड दिखाकर युवाओं को देता था सरकारी नौकरी का झांसा27 फरवरी की शाम साहित्य और राष्ट्रवाद के नाम रहेगी। देश के 11 प्रतिष्ठित कवि काव्य मंच सजाएंगे। इसी दिन श्री राम कला केंद्र द्वारा 'दानवीर कर्ण' पर आधारित एक भव्य नाट्य प्रस्तुति दी जाएगी, जो हमारी पौराणिक जड़ों से नई पीढ़ी को जोड़ने का काम करेगी। स्थानीय युवाओं के लिए 'कानपुर गॉट टैलेंट' जैसा मंच देकर सरकार उनकी प्रतिभा को निखारने का अवसर भी दे रही है।
महोत्सव का समापन 28 फरवरी को होगा, जहां पूरे भारत की लोक संस्कृति एक ही मंच पर नजर आएगी। शाम को गंगा के पावन पत्थर घाट पर भव्य 'गंगा आरती' के साथ आध्यात्मिक शांति का संदेश दिया जाएगा। अंत में सुप्रसिद्ध गायक गोपाल एम. तिवारी के म्यूजिक कंसर्ट के साथ महोत्सव का समापन होगा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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