फर्जी एटीएस अधिकारी बनकर दंपति से 90 लाख ठगने वाले तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार
लखनऊ। लखनऊ में यूपी एटीएस का अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर दंपति से 90 लाख रुपये की ठगी के मामले में साइबर क्राइम ने तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। अपराधियों ने दंपति को डिजिटल बंधक बनाकर आरटीजीएस के जरिए रुपये ट्रांसफर करा लिए। पुलिस उपायुक्त अपराध कमलेश कुमार दीक्षित ने मंगलवार को बताया कि तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गये हैं। इन्होंने अपने नाम गोरखपुर का रहने वाला मयंक श्रीवास्तव, गाजियाबाद का इरशाद और दिल्ली के रानीखेड़ा निवासी आकाश उर्फ मनीष बताए हैं। इनके पास से कई बैंकों के पासबुक, चेकबुक आदि चीजें बरामद की हैं।
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ये भी पढ़ें रामपुर: भाजपा की बजट चौपाल में गूंजी आत्मनिर्भर भारत की गूंज, विधायक आकाश सक्सेना ने गिनाईं खूबियांपूछताछ में पता चला है कि आर्थिक तंगी के चलते मयंक इरशाद के संपर्क में आया था। उसके कहने पर वह दिल्ली गया और उसकी मुलाकात आकाश और जीतू से हुई। उन लोगों के कहने पर उसने अपना मोबाइल, चालू खाता और उससे जुड़ी सारी जानकारी उन्हें दे दी। इन लोगों ने उसे अलग—अलग होटल में ठहराया और इस दौरान उसके मोबाइल से साइबर फ्रॉड से संबंधित करोड़ों रुपये के लेन-देन संचालित किए। इसके बदले में उसे दो लाख रुपये का आश्वासन देते हुए 10 हजार रुपये दिया गया। इसके बाद उन लोगों ने मयंक का बैंकों के एटीएम चेकबुक आदि डेबिट कार्ड ले लिया।
वहीं, दूसरे अभियुक्त इरशाद ने बताया कि तीन प्रतिशत कमीशन पर आकाश और जीतू के लिए काम करता था। वह खाताधारकों को धन के लालच में फंसाकर उनके बैंक खाते और संबंधित चीजें ले लेता था। उसने उन्हें लोगों के नंबर भी उपलब्ध कराये। अभियुक्त मनीष ने स्वीकार किया कि 3 प्रतिशत पर जीतू के लिए काम करता था। मयंक की सहमति पर उसके चेकबुक, खाता लिया था। अभियुक्त के खाते में 9 फरवरी को ठगी के एक करोड़ छह लाख 30 हजार रुपये आये हैं, जिन्हें एनसीसीआरपी पोर्टल पर चेक किये जाने पर तमिलनाडु और अन्य कई राज्यों से शिकायत दर्ज पाई गई।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन लोगों ने 26 जनवरी को एक महिला को यूपी एटीएस का अधिकारी बताते हुए आतंकवाद एवं मनी लॉड्रिंग जैसे गंंभीर अपराधों में संलिप्त होने का आराेप लगाकर डराया-धमकाया। कानूनी कार्रवाई का हवाला देकर उन्हें सिग्नल ऐप डाउनलोड करने के लिए बाध्य किया गया। डिजिटल अरेस्ट करने के बाद दूसरे व्यक्ति ने उच्चतम न्यायलय के फर्जी आदेश और सीजर दस्तावेज दिखाकर उन्हें विश्वास में लेकर 29 जनवरी और 9 फरवरी के बीच आरटीजीएस के जरिए अलग—अलग बैंक खातों में 90 लाख रुपये अंतरित करा लिए गये। इस दौरान उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखते हुए डराते धमकाते रहे। अभियुक्तों ने उनसे पुन: 11 लाख रुपये मांगे तो उन्हें शक हुआ और इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। अभिुयक्तों के खिलाफ अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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