KGMU में अवैध मजारों का विवाद: विहिप ने दी हटाने की चेतावनी, प्रशासन सतर्क

लखनऊ। लखनऊ स्थित किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में लव जिहाद व धर्मान्तरण का मामला ठण्डा नहीं पड़ा है कि विश्व हिन्दू परिषद ने लैंड जिहाद का मुद्दा उठा दिया है। विहिप के प्रान्त संगठन मंत्री विजय प्रताप ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि केजीएमयू लैंड जिहाद की चपेट में है। यह चिकित्सा शिक्षा का परिसर है। केजीएमयू को लव जिहाद एवं लैंड जिहाद का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि केजीएमयू परिसर में बनी आधा दर्जन से अधिक अवैध मजारें सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं।
प्रान्त संगठन मंत्री ने कहा कि केजीएमयू के लव जिहाद के विषय को सबसे पहले विहिप ने उजागर किया एवं कार्यवाही की। आने वाले समय में विहिप शासन प्रशासन के सहयोग से इन मजारों को भी हटवाने का काम करेगा।
अप्रैल 2025 में चिकित्सकों पर मुस्लिमों ने किया था हमला
विगत अप्रैल 2025 में केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग के पीछे बनी मजार के पास से अतिक्रमण हटाने गयी टीम पर मुस्लिम समाज के लोगों ने हमला कर दिया था। इस हमले में कई चिकित्सक चोटिल भी हुए थे। इसके बाद पुलिस प्रशासन के सहयोग से नेत्र रोग विभाग के पीछे बनी मजार के पास बनी दर्जनों दुकानों को ध्वस्त किया गया था लेकिन मजार अभी भी खड़ी है। उस मजार पर अभी भी गतिविधियां संचालित हैं। इस मजार का परिसर 20 हजार स्क्वॉयर फिट का है। यहां गाड़ियां खड़ी होती हैं। केजीएमयू इस मजार को शिफ्ट कराने के प्रयास में है। ट्रामा सेन्टर एवं क्वीनमेरी में भी है मजार केजीएमयू के ट्रामा सेन्टर के बगल में दाहिनी ओर एक मजार बनी है। इसी तरह क्वीनमेरी परिसर में पीर ए मुर्शिद हाजी हरमैन शाह की मजार है। यह मजार क्वीनमेरी के गेट के दाहिनी ओर बनी है। इस मजार का पूरा परिसर काफी बड़ा है। यहां उर्स का भी आयोजन भी इतेजामिया कमेटी की ओर से होता है। चारों तफर से दीवार है। मुख्य गेट पर बाकायदा मजार का गेट है। इसी तरह न्ये ओपीडी बिल्डिंग और न्यू डेंटल बिल्डिंग के बीच में दरगाह हजरत मख्दूमशाह मीना शाह की मजार है। इसका मुख्य गेट मुख्य मार्ग पर ही है। इस मजार के परिसर में 50 से अधिक दुकानें स्थायी रूप से लगती हैं। अंदर का परिसर भी संवेदनशील है। वहीं, डालीगंज स्थित केजीएमयू की आरएलसी बिल्डिंग के पास भी मजार बनी है। इस मजार को हटाने के लिए भी एक बार प्रशासन की टीम आयी थी लेकिन केजीएमयू प्रशासन के लचर रवैये के कारण मजार हटी नहीं। केजीएमयू के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के ओपीडी बिल्डिंग के पास भी एक मजार है।
हिन्दू जागरण मंच के पदाधिकारी शिव कुमार ने कहा कि केेजीएमयू परिसर में बनी मजारों की खुदाई कर जांच की जानी चाहिए। भाजपा के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने कहा कि केजीएमयू में मजारों का बाजार लगाकर जिहाद का मुख्य केन्द्र बनाया जा रहा है। जब तक अस्पताल व विश्वविद्यालय का परिसर मजार मुक्त नहीं होगा जिहाद पनपता रहेगा।
केजीएमयू से हटेंगी सभी मजारें केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ के.के. सिंह ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि कई मजारें हटायी जा चुकी हैं। जो बची हैं नियमानुसार कार्यवायी कर उन्हें भी हटाया जाएगा। केजीएमयू के नेत्र रोग के पीछे बनी मजार को एक किनारे शिफ्ट किया जाएगा ताकि खाली जमीन पर निर्माण कार्य कराया जा सके।
केजीएमयू में हुई नियुक्तियों की जांच की मांग
विश्व हिन्दू परिषद ने शुक्रवार को केजीएमयू में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर कुलपति के ओएसडी को हटाने और सन 2021 से 2025 तक चिविवि में हुई नियमित, एड-हॉक, नर्सिंग एवं हर प्रकार की नियुक्तियों की जांच कराने की मांग की है। विहिप के प्रान्त संगठन मंत्री विजय प्रताप ने कहा कि लव जिहाद एवं धर्मांतरण जैसी घटनाएं शैक्षिक परिसरों एवं समाज में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। आज हम शांति पूर्वक सरकार को हमारी मांगों पर कार्यवाही करने हेतु ज्ञापन देने आए हैं। अगर मांग नहीं पूरी होती हैं तो बड़ा आंदोलन करेंगे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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