कुख्यात ज्ञानेंद्र ढाका और उसके पिता समेत 6 पर केस दर्ज, जानें क्या है पूरा विवाद
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात अपराधी ज्ञानेंद्र ढाका एक बार फिर कानूनी शिकंजे में फंस गया है। इस बार पुलिस ने न केवल ज्ञानेंद्र, बल्कि उसके पिता समेत छह लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
यह मामला मुख्य रूप से जमीन पर अवैध कब्जे, रंगदारी और जान से मारने की धमकी से जुड़ा बताया जा रहा है।पीड़ित पक्ष का आरोप है कि ज्ञानेंद्र ढाका और उसके सहयोगियों ने बलपूर्वक उनकी कीमती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की।
ये भी पढ़ें महोबा के चर्चित किरन पुरवार हत्याकांड का खुलासा, नौकरानी ने बेटे संग की थी हत्या, दोनों गिरफ्तारशिकायत के अनुसार, आरोपियों ने जमीन छोड़ने के बदले या वहां निर्माण कार्य जारी रखने के लिए भारी-भरकम रकम (रंगदारी) की मांग की।
पुलिस रिपोर्ट में ज्ञानेंद्र के पिता का नाम भी शामिल है, जिन पर साजिश रचने और अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप है। इनके अलावा चार अन्य करीबी गुर्गों को भी नामजद किया गया है।
कौन है ज्ञानेंद्र ढाका?
ज्ञानेंद्र ढाका पश्चिमी उत्तर प्रदेश (विशेषकर मेरठ, बागपत और मुजफ्फरनगर क्षेत्र) का एक जाना-माना नाम है, जिसका आपराधिक इतिहास काफी पुराना है।
उसके खिलाफ हत्या, लूट, अपहरण और रंगदारी के दर्जनों मामले दर्ज हैं।वह लंबे समय से जेल में बंद रहा है, लेकिन बाहर आने पर या जेल के भीतर से ही अपना सिंडिकेट चलाने के आरोप उस पर लगते रहे हैं। क्षेत्र में उसके नाम का खौफ है और वह अक्सर प्रतिद्वंद्वी गैंग्स के साथ वर्चस्व की लड़ाई को लेकर चर्चा में रहता है।
पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (जैसे रंगदारी, धमकी और अवैध जमावड़ा) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की कई टीमें ज्ञानेंद्र के पिता और अन्य नामजद आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं।
अपराध की गंभीरता को देखते हुए पुलिस इन सभी पर जल्द ही गैंगस्टर एक्ट लगाने और उनकी अवैध संपत्तियों को कुर्क करने की योजना बना रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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