पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की मांग तेज: मेरठ के अधिवक्ता पीएम मोदी के कार्यक्रम में उठाएंगे आवाज
मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की दशकों पुरानी मांग को लेकर मेरठ के अधिवक्ताओं ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा की अध्यक्षता और महामंत्री राजेन्द्र सिंह राणा के संचालन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेरठ आगमन पर अधिवक्ता अपनी मांग को पुरजोर तरीके से उठाएंगे। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस बात पर गहरा रोष व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान बेंच की मांग हेतु प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए समय नहीं दिया गया है।
अधिवक्ता समाज ने तैयार की विरोध की रणनीति
बैठक में तय किया गया कि यदि प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री से वार्ता के लिए समय सुनिश्चित नहीं कराया जाता है, तो मेरठ के अधिवक्ता बिना अपनी आधिकारिक वेशभूषा के प्रधानमंत्री की रैली स्थल पर अलग-अलग समूहों में पहुंचेंगे। वहां पहुंचकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आम जनता के साथ हो रहे अन्याय को लेकर हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग की जाएगी। अधिवक्ताओं ने व्यापारी वर्ग और आम जनता से भी आग्रह किया है कि वे इस संघर्ष में उनका साथ दें और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में पहुंचकर इस मांग को मजबूती प्रदान करें।
प्रतिनिधिमंडल की बैठक और भविष्य की योजना
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 22 फरवरी 2026 को प्रातः साढ़े ग्यारह बजे मेरठ बार एसोसिएशन के कचहरी स्थित सभागार में वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिवक्ता एकत्रित होंगे। वहां से प्रधानमंत्री से वार्ता हेतु प्रतिनिधिमंडल के रूप में संपर्क करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अतिरिक्त बार एसोसिएशन ने यह भी निर्णय लिया है कि आगामी 22 जून 2026 को समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से भी इस मांग को जनता और सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भरी हुंकार
इस बैठक में पूर्व अध्यक्षों, पूर्व महामंत्रियों और प्रबंध समिति के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से महेंद्र पाल शर्मा, गजेंद्र सिंह धामा, रविकान्त भारद्वाज, सतीश कुमार शर्मा और नैपाल सिंह सोम जैसे वरिष्ठ नाम शामिल थे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि हाई कोर्ट बेंच की स्थापना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नागरिकों के लिए सुलभ न्याय सुनिश्चित करने हेतु अनिवार्य है और जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
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