मेरठ का कपसाड़ हत्याकांड, गांव छावनी में तब्दील,कर्फ्यू जैसे हालात,पीड़िता के घर लगे सीसीटीवी
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कपसाड़ गांव में 8 जनवरी को हुई दलित महिला सुनीता की हत्या का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। पुलिस ने इस हत्याकांड में आरोपी पारस सोम को जेल भेज दिया है। युवती के बयान के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में धाराएं बढ़ा दी हैं। घटना के बाद से पूरा गांव कर्फ्यू जैसे हालात में है और पुलिस ने कपसाड़ को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया है।
मां की हत्या के बाद रूबी को अगवा कर फरार हुआ पारस सोम दो दिन बाद सहारनपुर में पकड़ा गया। दोनों को मेरठ लाया गया, जहां पारस को जेल भेज दिया गया, जबकि रूबी को पहले संवासिनी गृह और फिर सोमवार शाम पुलिस सुरक्षा में परिवार के सुपुर्द किया गया। पुलिस ने रूबी के घर के चारों ओर CCTV कैमरे लगवाए हैं।
कोर्ट में रूबी का बयान: ‘मां को मारने की धमकी देकर ले गया’
कोर्ट में दर्ज बयान में रूबी ने कहा,
“मुझे जबरन ले जाया गया। उसने तमंचा दिखाकर कहा कि जैसे मां को मारा है, वैसे ही तुम्हें भी मार दूंगा। डर के मारे ट्रेन में चिल्ला नहीं पाई। मेरी जिंदगी की सबसे कीमती चीज—मेरी मां—मुझसे छीन ली गई।”
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पूरे घटनाक्रम और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर रूबी की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई उसी अनुसार की जाएगी।
पारस का दावा: ‘मैं बेगुनाह हूं’
पुलिस कस्टडी में पारस सोम ने खुद को निर्दोष बताया। उसका दावा है कि वह और रूबी तीन साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे और दोनों साथ भागे थे। उसने कहा कि रूबी की शादी तय होने के बाद वे घर छोड़ना चाहते थे और हाथापाई में यह घटना हो गई। हालांकि, पुलिस ने पारस के इन दावों को खारिज कर दिया है।
गांव बना सियासी रणक्षेत्र
घटना के बाद कपसाड़ गांव प्रदेश की सियासत का केंद्र बन गया। कांग्रेस ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद को मेरठ आने से रोकने के लिए पुलिस ने व्यापक घेराबंदी की।
10 जनवरी को वे पुलिस को चकमा देते हुए मेरठ बॉर्डर तक पहुंचे, लेकिन वहां से हिरासत में लेकर दिल्ली वापस भेज दिए गए। गाजियाबाद में काफिला रोके जाने पर वे कार छोड़कर दौड़ पड़े और बाइक से निकल गए।
14 रास्तों से सील गांव, आधार कार्ड देखकर मिल रही एंट्री
कपसाड़ गांव में डायरेक्ट और शॉर्टकट मिलाकर कुल 14 रास्तों को सील कर दिया गया है। अटेरना चौकी से लेकर सलावा और दौराला तक सभी मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात है।
गांव में प्रवेश के लिए आधार कार्ड जरूरी कर दिया गया है। बाहरी लोगों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। हर गली, हर चौराहे पर महिला पुलिस, PAC और स्थानीय फोर्स तैनात है।
ग्रामीणों की आवाज: ‘घर से निकलना भी मुश्किल’
गांव के लोगों का कहना है कि हालात बेहद सख्त हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, घर से बाहर निकलने, छत पर जाने और खेत जाने पर भी पूछताछ की जा रही है। वीडियो और फोटो बनाने पर पूरी तरह रोक है। सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है। नेटवर्क बाधित है और कुछ लोगों के अकाउंट बंद होने की बात भी सामने आई है।
सब्जी तक नहीं, स्कूल सिर्फ परीक्षा के लिए खुले
चार दिन से गांव में सब्जी और फल नहीं पहुंच पाए हैं। बाहर जाने की अनुमति नहीं है। केवल खेत पर काम करने की छूट दी गई है।
स्कूलों में सिर्फ परीक्षा देने वाले बच्चों को बुलाया जा रहा है। शिक्षक बच्चों को परीक्षा के बाद घर तक छोड़कर आ रहे हैं।
पुलिस का बयान
ADG भानु भास्कर ने कहा,
“युवती के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। हर शाम सीनियर अधिकारी सुरक्षा की समीक्षा कर रहे हैं।”
