करोड़ों की जीएसटी चोरी के मास्टर माइंड रियासत के बारे में लखनऊ एसआईबी को मिला डाटा
मुरादाबाद। बोगस फर्मों के जरिए लकड़ी की खरीद-फरोख्त दिखाकर 85 लाख की जीएसटी चोरी में मुरादाबाद के विशेष जांच दल (एसआइटी) ने खुलासा किया था। गिरोह ने करीब 23 बोगस फर्में बनाई थीं और जीएसटी चोरी की थी। जीएसटी चोरी के मास्टर माइंड रियासत के बारे में लखनऊ एसआईबी को कुछ डाटा मिला है। राज्य कर विभाग मुरादाबाद में अपर आयुक्त ग्रेड 2 आरए सेठ ने शनिवार को बताया कि इसी आधार पर डाटा साझा कर मुरादाबाद और एसआईबी की टीम अन्य 25 फर्मों की छानबीन कर रही है।
राज्य कर विभाग ने लकड़ी से लदे दो ट्रकों को पकड़ने के बाद जांच के दौरान सात बोगस फर्मों के बारे में जानकारी हासिल की थी। जांच में आया कि इस गिरोह ने सौ करोड़ का टर्नओवर किया है। ट्रक चालकों से बरामद कागजात के आधार पर जांच में आया है कि इस गिरोह ने एक ही मोबाइल नंबर से सीतापुर जिले की भारत इंटरप्राइजेज और रोलेक्स फर्म का पंजीकरण कराया है। अन्य पांच फर्में अलग अलग नंबरों से पंजीकृत कराई गई हैं। इन फर्मों के संचालन के लिए पांच बैंकों में खाते खोले गए हैं।
अपर आयुक्त ग्रेड 2 आरए सेठ ने बताया कि लखनऊ से मोईन और काशीपुर से रियासत एटीएम और अन्य माध्यमों से पैसे निकालते हैं। काशीपुर से मास्टर माइंड रियायत ने हाल ही में साढ़े तीन करोड़ रुपये बैंकों से निकाले हैं। इस मामले में राज्य कर अधिकारियों ने बैंकों से एटीएम वीडियो फुटेज मंगाया है। विभाग की एक टीम ने जांच की तो पाया कि दो फर्मे सीमेंट और सरिया का बिल काट रही हैं। इन फर्मों का संबंध बोगस फर्मों से है।
बोगस फर्मों के बैंक खाते सीज करने के लिए शीघ्र ही राज्य कर विभाग निर्देश जारी करेगा। पता चला कि इस गिरोह का संबंध ठाकुरद्वारा और रामपुर के लकड़ी कारोबारियों से हैं। गिरोह ने हरियाणा में काफी मात्रा में लकड़ी की सप्लाई फर्जी कागजात के आधार पर की है। इस मामले में राज्य कर अधिकारियों ने बोगस फर्मों से जुड़ी 25 फर्मों का डाटा खंगालना शुरू कर दिया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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