सहारनपुर: 17 साल बाद सरहद पार जाएगा पाकिस्तानी जासूस, फर्जी पहचान के सहारे भारत में बिछाया था साजिशों का जाल
सेना के संवेदनशील नक्शों के साथ पकड़े गए इकबाल भट्टी को कड़ी सुरक्षा में वाघा बॉर्डर भेजा गया; डिटेंशन सेंटर में पूरी हुई कागजी औपचारिकताएं
सहारनपुर। देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने और दुश्मन मुल्क के लिए जासूसी करने के दोषी एक पाकिस्तानी नागरिक को उसकी सजा पूरी होने के बाद सोमवार को वापस उसके देश रवाना कर दिया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे सहारनपुर से वाघा बॉर्डर ले जाया गया है, जहाँ से उसे पाकिस्तानी रेंजर्स के हवाले किया जाएगा। इस जासूस ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे न केवल भारतीय पहचान हासिल कर ली थी, बल्कि वह करीब एक साल तक सहारनपुर के रिहायशी इलाके में छिपकर सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारियाँ जुटा रहा था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और जेल की सजा काटने के बाद अब केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों पर उसे डिपोर्ट किया गया है।
जासूसी के इस मामले में दोषी ठहराए गए इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल को सोमवार सुबह पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उसकी मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद एक विशेष पुलिस टीम उसे गोपनीय रूट से बॉर्डर के लिए लेकर रवाना हुई। सुरक्षा कारणों से पुलिस ने उसके जाने का समय और रास्ता पूरी तरह गुप्त रखा। अटाली (वाघा) बॉर्डर पर पहुँचने के बाद मंगलवार दोपहर तक उसे पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा। 17 साल की सजा पूरी करने के बाद वह पिछले 11 महीनों से रिहा तो हो चुका था, लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी न होने के कारण उसे सहारनपुर के डिटेंशन सेंटर में कड़ी निगरानी में रखा गया था।
ये भी पढ़ें महाशिवरात्रि पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने दीं शुभकामनाएंघटनाक्रम के अनुसार, इकबाल भट्टी को 8 अगस्त 2008 को पंजाब पुलिस ने पटियाला से गिरफ्तार किया था। उसके कब्जे से भारतीय सेना के बेहद संवेदनशील नक्शे बरामद हुए थे। जांच में खुलासा हुआ कि वह सहारनपुर के हकीकत नगर में 'देवराज सहगल' बनकर रह रहा था। उसने फर्जी वोटर आईडी, पैन कार्ड और राशन कार्ड तक बनवा लिए थे और इन्हीं के सहारे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में खाता भी खुलवा लिया था। बैंक मैनेजर को शक होने पर 6 नवंबर 2008 को उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सुरक्षा कारणों से उसे सहारनपुर जेल के बजाय गौतमबुद्धनगर जिला जेल में रखा गया था, जहाँ उसने अपने जीवन के 17 साल बिताए।
एएसपी मनोज यादव ने बताया कि पाकिस्तानी नागरिक शाहिद इकबाल भट्टी पर थाना सदर बाजार में चार मुकदमे दर्ज थे। सजा पूरी होने और गृह मंत्रालय व विदेश मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद अब डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सोमवार को मेडिकल जांच के दौरान इकबाल ने मीडिया के सामने खुद को निर्दोष बताने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई साक्ष्यों और न्यायालय के आदेशों के आधार पर की गई है। इस जासूस की रवानगी के साथ ही सहारनपुर पुलिस और एलआईयू ने एक लंबी कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
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