खाली खेत में करें इस फसल की खेती 60 दिन में होगी तगड़ी कमाई कम लागत में मिलेगा बड़ा मुनाफा
आज के समय में खेती में कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फसलों की मांग तेजी से बढ़ रही है। रबी फसल की कटाई के बाद अक्सर खेत कुछ समय के लिए खाली रह जाते हैं। ऐसे में अगर इस समय का सही उपयोग किया जाए तो कम समय में अच्छी कमाई की जा सकती है।
इसी वजह से गरमा मूंग की खेती को एक बेहतरीन विकल्प माना जा रहा है। यह फसल बहुत कम समय में तैयार हो जाती है और कम लागत में अच्छा उत्पादन देती है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में इसकी खेती तेजी से बढ़ रही है। सही समय पर बुआई और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर इस फसल से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
ये भी पढ़ें 30 से 45 दिन में तैयार होने वाली यह खेती किसानों को दे रही लाखों की कमाई कम लागत में बड़ा मुनाफागरमा मूंग की खेती का सही समय
गरमा मूंग की खेती गर्मी के मौसम में की जाने वाली एक महत्वपूर्ण फसल मानी जाती है। इसकी बुआई का सही समय मार्च का महीना माना जाता है। अगर इस फसल की बुआई 15 मार्च तक कर दी जाए तो पौधों का विकास बेहतर तरीके से होता है।
सही समय पर बुआई करने से फसल को अनुकूल तापमान और पर्याप्त धूप मिलती है जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन में भी वृद्धि देखने को मिलती है। इसलिए समय पर बुआई करना इस फसल की सफलता के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।
ये भी पढ़ें 1 एकड़ में पान की खेती से कमाएं 10 लाख तक सालाना, कम जमीन में ज्यादा मुनाफा देने वाली नकदी फसल60 से 65 दिन में तैयार हो जाती है फसल
गरमा मूंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फसल बहुत कम समय में तैयार हो जाती है। आमतौर पर इसकी फसल लगभग 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है।
कम समय में तैयार होने की वजह से यह फसल खाली खेतों का बेहतर उपयोग करने का अवसर देती है। इससे कम समय में अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है और खेती की कुल आय में भी बढ़ोतरी होती है।
उन्नत किस्म से मिलता है बेहतर उत्पादन
गरमा मूंग की खेती में सही किस्म का चयन करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पहले कई किस्मों की खेती की जाती थी लेकिन अब शिखा किस्म को काफी बेहतर माना जा रहा है।
यह किस्म लगभग 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी पैदावार भी अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा यह मौसम के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करती है जिससे उत्पादन का जोखिम कम हो जाता है।
खेती की तैयारी और बुआई की विधि
गरमा मूंग की खेती के लिए खेत की अच्छी तैयारी जरूरी होती है। सबसे पहले खेत की दो बार जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इससे बीज का अंकुरण बेहतर होता है और पौधों की बढ़वार भी अच्छी होती है।
खेत तैयार होने के बाद छींटा विधि से बुआई की जा सकती है। बीज की मात्रा लगभग 10 किलो प्रति एकड़ रखी जाती है जिससे पौधों का संतुलित विकास हो सके और उत्पादन बेहतर मिले।
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
गरमा मूंग की खेती की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है। इस फसल को तैयार करने में लगभग 10 हजार से 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तक खर्च आता है।
अगर फसल अच्छी हो जाए तो लगभग 40 हजार से 45 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। कम समय और कम लागत में मिलने वाला यह लाभ इसे खेती का एक आकर्षक विकल्प बनाता है।
मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ाती है यह फसल
गरमा मूंग की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाती है। जब फसल की कटाई के बाद इसके अवशेष को खेत में मिला दिया जाता है तो इससे मिट्टी में जैविक तत्व और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।
इससे अगली फसल की पैदावार भी बेहतर होती है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है। इस तरह यह फसल कम समय में आय बढ़ाने के साथ साथ मिट्टी की सेहत सुधारने में भी मदद करती है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

टिप्पणियां