बड़े नवाचार भारी बजट से नहीं, बल्कि बड़े विचारों से जन्म लेते हैं : प्रो. संदीप पोद्दार
मुरादाबाद स्थित तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय में सस्टेनेबल इन्नोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप विषय पर आयोजित कार्यशाला में लिंकन विश्वविद्यालय कॉलेज, मलेशिया के शोध एवं नवाचार के उप कुलपति प्रोफेसर संदीप पोद्दार ने कहा कि दुनिया के बड़े नवाचार हमेशा बड़े बजट से नहीं, बल्कि बड़े और स्पष्ट विचारों से जन्म लेते हैं। यदि सोच मजबूत हो, उद्देश्य स्पष्ट हो और निरंतर प्रयास किया जाए, तो सीमित संसाधनों और कम धनराशि में भी प्रभावशाली और उपयोगी नवाचार किए जा सकते हैं।
प्रोफेसर संदीप पोद्दार तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के संस्थागत नवाचार परिषद की ओर से आयोजित कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के प्राचार्य प्रोफेसर नवनीत कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में ऑप्टोमेट्री विभाग के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार यादव, फॉरेंसिक साइंस विभाग के अध्यक्ष रवि कुमार, संस्थागत नवाचार परिषद के समन्वयक योगेश कुमार, रेडियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष अमित बिष्ट तथा डॉ. पिनाकी अदक सहित अनेक शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
अपने संबोधन में प्रोफेसर पोद्दार ने कहा कि इतिहास में कई महत्वपूर्ण आविष्कार सीमित संसाधनों और अनेक असफलताओं के बावजूद विकसित किए गए हैं। टेलीफोन और विमान जैसे आविष्कार इसके प्रमुख उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि नवाचार केवल तकनीक का विषय नहीं है, बल्कि यह सोच, दृष्टिकोण और रचनात्मकता का परिणाम होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति से सीखने की सलाह देते हुए कहा कि प्रकृति स्वयं एक महान शिक्षक है। आज कई आधुनिक तकनीकें जैव अनुकरण के सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसमें वैज्ञानिक प्रकृति की संरचना और कार्यप्रणाली से प्रेरणा लेकर नए नवाचार विकसित करते हैं।
प्रोफेसर पोद्दार ने कहा कि एक साधारण विचार को सही दिशा, गहन शोध और दृढ़ संकल्प के माध्यम से एक सफल स्टार्टअप में बदला जा सकता है। युवाओं को अपनी कल्पनाशक्ति और रचनात्मक सोच का उपयोग करते हुए समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने चाहिए।
मुख्य सत्र के बाद आयोजित कार्यशाला में शोध प्रकाशन और नवाचार विषय पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र लेखन, स्कोपस और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-केयर सूचीबद्ध शोध पत्रिकाओं का चयन, शोध में नैतिकता, पेटेंट प्रक्रिया तथा शैक्षणिक नवाचार को उद्योग से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
प्रोफेसर पोद्दार ने शोधार्थियों को सावधान करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अनेक भ्रामक और शोषणकारी वेबसाइटें तथा शोध पत्रिकाएं भी मौजूद हैं, जिनका उद्देश्य केवल शोधकर्ताओं से धन प्राप्त करना होता है। ऐसी पत्रिकाओं में शोध की गुणवत्ता, प्रामाणिकता और शैक्षणिक मानकों का पालन नहीं किया जाता, इसलिए शोधार्थियों को प्रतिष्ठित और मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं का ही चयन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शोध केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समस्या समाधान की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। वास्तविक शोध वही है जो समाज, उद्योग और पर्यावरण से जुड़ी वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करे।
कार्यशाला में रेडियोलॉजी, ऑप्टोमेट्री, फिजियोथेरेपी, मेडिकल लैबोरेटरी तकनीक तथा फॉरेंसिक साइंस विभाग के विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्टार्टअप, वित्तीय सहायता, नवाचार की चुनौतियों और सतत व्यवसाय मॉडल से संबंधित कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक और संतोषजनक उत्तर दिया।
कार्यक्रम का संचालन सौम्या त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प भी लिया।
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लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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