मार्च में तरबूज की खेती का गोल्डन फॉर्मूला, गर्मी में रिकॉर्ड पैदावार और तगड़ा मुनाफा पाने का सबसे आसान तरीका
गर्मी का मौसम आते ही बाजार में एक फल की मांग तेजी से बढ़ जाती है और वह है तरबूज। तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच यह फल लोगों को ठंडक देता है और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। यही वजह है कि गर्मियों में इसकी खपत बहुत ज्यादा होती है। अगर आप सही समय पर सही तकनीक से तरबूज की खेती करते हैं तो कम समय में शानदार उत्पादन और बेहतर कमाई हासिल कर सकते हैं। मार्च का महीना इसकी बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
क्यों फायदेमंद है मार्च में तरबूज की बुवाई
तरबूज एक गर्म मौसम की फसल है जिसे अच्छी धूप और गर्म तापमान पसंद है। मार्च के महीने में इसकी बुवाई करने से पौधों को बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है। समय पर बोई गई फसल 75 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है और गर्मी के पीक सीजन में बाजार में पहुंचती है जब दाम भी अच्छे मिलते हैं।
इस फसल के लिए बलुई दोमट मिट्टी या ऐसी भूमि जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो सबसे बेहतर मानी जाती है। खेत की तैयारी के दौरान दो से तीन बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए। प्रति एकड़ 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की शुरुआती बढ़वार मजबूत होती है।
उन्नत किस्म और सही बुवाई का तरीका
अच्छी पैदावार के लिए उन्नत और प्रमाणित बीज का चयन बेहद जरूरी है। शुगर बेबी और अरका ज्योति जैसी किस्में बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। बीज को लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर बोना चाहिए और कतार से कतार की दूरी 2 से 2.5 मीटर रखना फायदेमंद रहता है।
बुवाई के समय ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाना काफी लाभकारी है। इससे पानी की बचत होती है और पौधों को जरूरत के अनुसार नमी मिलती रहती है। ड्रिप के साथ मल्चिंग का उपयोग करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं। मल्चिंग से तैयार फल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
खाद और सिंचाई का संतुलित प्रबंधन
तरबूज की अच्छी बढ़वार के लिए नाइट्रोजन फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग जरूरी है। शुरुआती अवस्था में नाइट्रोजन की सही मात्रा पौधों को तेजी से बढ़ने में मदद करती है जबकि फूल और फल बनने के समय पोटाश की जरूरत बढ़ जाती है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन से उत्पादन में स्पष्ट बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
ड्रिप सिंचाई अपनाने से पानी की काफी बचत होती है और पौधों की जड़ों तक सीधे नमी पहुंचती है। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और फल का आकार और वजन बेहतर होता है।
रोग और कीट प्रबंधन पर रखें नजर
अच्छी फसल के लिए समय समय पर निराई गुड़ाई करना जरूरी है ताकि खरपतवार पौधों की वृद्धि को प्रभावित न करें। फल मक्खी और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोगों से बचाव के लिए नियमित निगरानी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर जैविक या अनुशंसित कीटनाशकों का सीमित उपयोग किया जा सकता है।
जब फल पकने लगता है तो उसकी बाहरी सतह चमकदार दिखाई देती है और थपथपाने पर भारी आवाज आती है। यही संकेत है कि फसल कटाई के लिए तैयार है। वैज्ञानिक तरीके से की गई तरबूज की खेती कम लागत में ज्यादा उत्पादन देने की क्षमता रखती है। सही समय पर बुवाई और बेहतर प्रबंधन से गर्मी के मौसम में बढ़ती मांग का फायदा उठाकर अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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