देसी तकनीक से टमाटर की खेती में जबरदस्त कमाई, एक पौधे से 10 किलो तक उत्पादन
अगर आप खेती से अच्छी कमाई करने का सपना देख रहे हैं तो यह खबर आपके लिए प्रेरणा बन सकती है। आजकल सब्जी की खेती गांव गांव में तेजी से बढ़ रही है और खासकर टमाटर की खेती किसानों के लिए मुनाफे का बड़ा जरिया बनती जा रही है। सही समय पर रोपाई और देसी तकनीक के सही उपयोग से टमाटर की फसल शानदार उत्पादन दे सकती है।
खेत की तैयारी से शुरू होती है सफलता की कहानी
टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले खेत की सही तैयारी जरूरी होती है। खेत को अच्छी तरह जुतवाया गया। इसके बाद मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद डाली गई और मजबूत क्यारियां तैयार की गईं। जब खेत पूरी तरह तैयार हो गया तब पौधों की रोपाई की गई।
कार्तिक महीने में रोपाई की गई और लगभग एक महीने के भीतर पौधों पर फल आना शुरू हो गया। सही समय पर रोपाई करने से पौधों को अनुकूल मौसम मिला जिससे विकास तेज हुआ और फसल जल्दी तैयार हो गई।
देसी तकनीक से पौधे रहते हैं स्वस्थ
इस खेती की खास बात देसी तकनीक का इस्तेमाल है। पौधों के पास लकड़ी की खूंटी गाड़कर उन्हें सहारा दिया गया। इससे पौधे जमीन पर फैलने के बजाय सीधे खड़े रहे। जब पौधे सीधे और खुले वातावरण में रहते हैं तो उनमें हवा और धूप का संचार बेहतर होता है। इससे रोग कम लगते हैं और फल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
यह छोटा सा देसी तरीका बड़ी सफलता की कुंजी बन गया। पौधे तंदुरुस्त रहे और लगातार फल देते रहे।
एक पौधे से 10 किलो तक टमाटर
इस तकनीक का असर उत्पादन पर साफ दिखा। हर चार दिन में एक पौधे से टमाटर तोड़े जाते हैं और एक पौधे से करीब 10 किलो तक उत्पादन मिल जाता है। यह किसी भी किसान के लिए बड़ी उपलब्धि है।
टमाटर की सुपर हाइब्रिड वैरायटी का चयन भी अहम रहा। यह वैरायटी ज्यादा फल देती है और बाजार में इसकी मांग भी अधिक रहती है। तैयार फसल को लोकल मार्केट में सप्लाई किया जाता है जहां ताजे और अच्छे आकार के टमाटर की अच्छी कीमत मिलती है।
कम लागत में बेहतर मुनाफा
देसी तकनीक अपनाने से लागत ज्यादा नहीं बढ़ती लेकिन उत्पादन में बड़ा फर्क आता है। लकड़ी की खूंटी और सही देखभाल से पौधों की उम्र बढ़ती है और फलन भी अधिक समय तक जारी रहता है। इससे किसानों को लगातार आमदनी मिलती रहती है।
टमाटर की यह खेती इस बात का उदाहरण है कि अगर सही योजना और मेहनत के साथ काम किया जाए तो सब्जी की खेती से भी शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है। आज कई किसान पारंपरिक अनाज की खेती के साथ साथ सब्जियों की खेती कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।
टमाटर की खेती बन रही कमाई का मजबूत जरिया
बाजार में टमाटर की मांग साल भर बनी रहती है। अगर किसान समय पर रोपाई करें सही वैरायटी चुनें और देसी तकनीक का सहारा लें तो उन्हें अच्छा उत्पादन और बेहतर दाम दोनों मिल सकते हैं।
यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो खेती को सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि एक मजबूत व्यवसाय के रूप में देखना चाहते हैं। मेहनत और समझदारी से टमाटर की खेती सच में आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती है।
Disclaimer : यह लेख सामान्य कृषि जानकारी पर आधारित है। उत्पादन और मुनाफा मिट्टी मौसम और बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है। खेती शुरू करने से पहले कृषि विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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