मेरठ में 'विदेशी' घुसपैठ का बड़ा खुलासा: 34 साल से छिपकर रह रही पाकिस्तानी मां-बेटी पर मुकदमा, ISI कनेक्शन की जांच शुरू
जासूसी का जाल या पहचान का फर्जीवाड़ा? आर्मी हेडक्वार्टर और दूतावासों की विजिट से मचा हड़कंप
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया विभाग की नींद उड़ा दी है। शहर के देहली गेट थाना क्षेत्र में एक पाकिस्तानी महिला और उसकी बेटी के खिलाफ भारतीय नागरिकता के बिना, दशकों से अवैध रूप से रहने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पहचान पत्र बनवाने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों पिछले 34 सालों से पुलिस और इंटेलिजेंस की नजरों से बचकर यहां रह रही थीं।
एसएसपी अविनाश पांडेय के आदेश पर हुई इस कार्रवाई ने एलआईयू (LIU) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोप है कि इन महिलाओं ने न केवल फर्जी कागजात तैयार किए, बल्कि संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों तक अपनी पहुंच बनाई।
निकाह पाकिस्तान में, जालसाजी मेरठ में
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब देहली गेट निवासी रुकसाना नाम की महिला ने साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, मेरठ के एक ब्रास बैंड कारोबारी फरहत मसूद ने साल 1988 में पाकिस्तान जाकर सबा उर्फ नाजी से निकाह किया था। निकाह के बाद सबा भारत आ गई। 1993 में उनकी बेटी ऐमन फरहत का जन्म भी पाकिस्तान में हुआ, जिसे पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत लाया गया था। कायदे से उन्हें भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि उन्होंने फर्जी तरीके से यहीं के दस्तावेज तैयार करवा लिए।
ISI से तार जुड़े होने का गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी तहरीर में बेहद गंभीर दावे किए हैं। आरोप है कि:
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फर्जी जन्म प्रमाण पत्र: पाकिस्तानी मूल की ऐमन का भारत के एक स्थानीय अस्पताल से फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनवाया गया।
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संवेदनशील दौरों की आशंका: अवैध निवास के दौरान इन मां-बेटी ने कथित तौर पर आर्मी हेडक्वार्टर और कई विदेशी दूतावासों (Embassies) की विजिट की।
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खुफिया एजेंसी से लिंक: रुकसाना ने आरोप लगाया है कि सबा के मायके पक्ष के संबंध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से हैं और ये लोग कारोबारी बनकर जासूसी की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
34 साल की 'खामोशी' ने सुरक्षा पर उठाए सवाल
एसएसपी ने बताया कि यह मामला सिर्फ एक अवैध निवास का नहीं, बल्कि बड़ी सुरक्षा चूक का संकेत दे रहा है। इतने वर्षों तक एक विदेशी नागरिक बिना वैध नागरिकता के शहर के बीचों-बीच कैसे रहता रहा, यह जांच का मुख्य बिंदु है। पुलिस अब इनके बैंक ट्रांजेक्शन, पासपोर्ट की डिटेल और पिछले सालों में की गई विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड खंगाल रही है। देहली गेट थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और विदेशी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
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