दिल्ली में तेजी से बढ़ा प्रदूषण, ग्रैप-3 के कुछ ही घंटे बाद लागू हुआ ग्रैप-4

नयी दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण तेजी से बढ़ने के कारण वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शनिवार को सुबह ग्रैप-3 लागू किया और शाम होते-होते ग्रैप-4 लागू करने की स्थिति बन गयी।
ग्रैप यानी चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना के चार चरण हैं जिनके तहत प्रदूषण कम करने के लिए जरूरी अलग-अलग उपायों को लागू किया जाता है। इसे लागू करने की जिम्मेदारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की है।
दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार तक ग्रैप-2 लागू था। आयोग ने शनिवार सुबह ग्रैप-3 लागू करने का फैसला किया जिसमें और कड़े प्रतिबंधों तथा अधिक उपायों का प्रावधान है। हालांकि इसके कुछ ही घंटे बाद तेजी से बढ़ते प्रदूषण का हवाला देते हुए ग्रैप-4 लागू कर दिया गया।
आयोग ने शनिवार शाम जारी एक बयान में कहा कि शहर में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। दिल्ली में शाम चार बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 431 दर्ज किया गया, जो धीमी हवा की गति, स्थिर वातावरण, खराब मौसम की स्थिति और प्रदूषकों के खराब फैलाव के कारण शाम छह बजे तक बढ़कर 441 हो गया।
बयान में कहा गया है, "एक्यूआई 'अति-गंभीर' श्रेणी के करीब पहुंचने और मौसम की स्थिति में तुरंत कोई सुधार की संभावना न होने के कारण ग्रैप-4 के तहत सभी उपायों को तुरंत प्रभाव से लागू करने का फैसला किया गया है।"
ग्रैप-4 के उपाय तब लागू किये जाते हैं जब एक्यूआई 450 से ऊपर चला जाता है या उसके ऊपर जाने का अनुमान होता है। इसमें स्थानीय प्रशासन के फैसलों के आधार पर निर्माण गतिविधियों पर रोक, कुछ पुराने मानकों के वाहनों प्रवेश पर रोक और स्कूलों को बंद करने जैसे सबसे सख्त प्रतिबंध शामिल हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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