विवादों के बाद भी यूट्यूब पर 'टटीरी' की धूम, एआई की मदद से बनाए जा रहे गाने के रीमिक्स
मुंबई। पंजाबी और बॉलीवुड सिंगर रैपर बादशाह लगातार विवादों में बने हुए हैं, क्योंकि उनके हालिया रिलीज गाने 'टटीरी' को लेकर हरियाणा में कई जगहों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। मामले में सिंगर के खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया, हालांकि बादशाह सोशल मीडिया के जरिए हरियाणा के लोगों से माफी मांग चुके हैं। सिंगर के गाने को यूट्यूब के सभी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है, लेकिन फिर भी सोशल मीडिया पर 'टटीरी' गाने की बाढ़ आ चुकी है और अलग-अलग प्लेटफॉर्म और आईडी से गाने को अपलोड किया जा रहा है। दरअसल, बादशाह का गाना 'टटीरी' उनका खुद का ऑरिजनल सॉन्ग नहीं है, बल्कि गाने की बीट और बोल हरियाणा के फोक सॉन्ग से प्रेरित हैं।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर में भाजपा को बड़ा झटका, दो बार के पूर्व विधायक के बेटे समाजवादी पार्टी में हुए शामिलगाने का ऑरिजनल वर्जन 3 साल पहले रिलीज हुआ था, जिसे फौजी करमबीर और सिमरन जागलान ने अपनी आवाज में गाया था। विवादों में आने के बाद अब यूट्यूब पर ऑरिजनल सॉन्ग की कई वीडियो देखी जा सकती हैं और पुराना गाना तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। कुछ गानों में बादशाह के गाने में फिल्माए गए सीन को दोहराया गया है और कुछ वीडियो में एआई का इस्तेमाल किया गया है। गाने में बादशाह के लिरिक्स (रैप) का इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि सारे ओरिजिनल लिरिक्स का इस्तेमाल किया गया है, बस म्यूजिक को रीमिक्स करते हुए बदलाव किए गए हैं।
भले ही बादशाह का गाना 'टटीरी' बैन हो चुका है, लेकिन इस कॉन्ट्रोवर्सी का फायदा ओरिजिनल सॉन्ग को मिल रहा है और सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर गाने का अलग ही 'बज' देखने को मिल रहा है। बात अगर ऑरिजनल सॉन्ग की करें तो ये गाना मन्नतों पर बना है, जिसमें शादी होने या फिर लड़का होने के बाद टटीरी को सोने की चोंच लगाने की बात की गई है। हरियाणवी लोकगीतों और संस्कृति में टटीरी का भावनात्मक और धार्मिक महत्व माना गया है। माना जाता है कि टटीरी का घर आना खुशखबरी का संकेत होता है और इसका उल्लेख महाभारत में भी किया गया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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