चुनाव आयुक्त नियुक्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 7 अप्रैल तक टली सुनवाई, CJI सूर्या कांत हटे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में चीफ जस्टिस की भूमिका समाप्त करने वाले केंद्र सरकार के कानून पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका की सुनवाई 7 अप्रैल तक के लिए टल गई है। इस दौरान चीफ जस्टिस ने स्वयं इस मामले की सुनवाई से अलग होने का निर्णय लिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि चूंकि मामला सीजेआई से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे सुनवाई के लिए दूसरी बेंच के सामने रखा जाना बेहतर होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर वे खुद इस मामले की सुनवाई करेंगे, तो उन पर पक्षपात का आरोप लगाया जा सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने भी सुझाव दिया कि यह मामला ऐसी बेंच को भेजा जाए, जिसमें कोई भावी चीफ जस्टिस शामिल न हो। इसके बाद चीफ जस्टिस ने निर्देश दिया कि 7 अप्रैल को यह केस दूसरी बेंच के सामने रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को पारदर्शी बनाने के लिए आदेश दिया था। इसके तहत इन पदों पर नियुक्ति एक समिति के द्वारा की जानी थी, जिसमें चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते। लेकिन, केंद्र सरकार ने कानून लाकर इस प्रक्रिया में चीफ जस्टिस की भूमिका समाप्त कर दी। इसके विरोध में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें इस कानून को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चीफ जस्टिस की भूमिका आवश्यक है।
उनका कहना है कि बिना चीफ जस्टिस की भागीदारी के यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र और भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि कानून के तहत नियुक्तियों की प्रक्रिया संवैधानिक है और इसमें किसी भी तरह का पक्षपात नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई को इसलिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि यह सीधे न्यायपालिका की भूमिका और चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है। अब 7 अप्रैल को यह मामला दूसरी बेंच के सामने रखा जाएगा, जो याचिकाओं की समीक्षा कर इसके आगे की कार्रवाई तय करेगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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