भारत के समुद्री बेड़े में शामिल हुआ स्वदेशी गोताखोर जहाज ‘डीएससी ए-20’..नौसेना की सहायता क्षमताओं में आएगी तेजी
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने कोच्चि के नौसेना बेस में मंगलवार को स्वदेशी गोताखोर जहाज ‘डीएससी ए-20’ अपने समुद्री बेड़े में शामिल कर लिया। दक्षिणी कमान का हिस्सा बनने वाले इस जहाज के माध्यम से भारतीय नौसेना की गोताखोरी और जल के भीतर सहायता क्षमताओं में तेजी आएगी।
दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना की उपस्थिति में हुआ यह औपचारिक समारोह नौसेना की परिचालन क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण वृद्धि का प्रतीक रहा। डीएससी ए-20 का निर्माण कोलकाता के टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) में किया गया है। गोताखोरी में सहायक पांच डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट श्रृंखला का यह पहला पोत है। इसको तटीय जलक्षेत्र में विभिन्न प्रकार के गोताखोरी और जलीय अभियानों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। यह पोत उन्नत एवं अत्याधुनिक गोताखोरी प्रणालियों से सुसज्जित है, जो सुरक्षा, विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता के सर्वोच्च मानकों पर खरा उतरता है।
नौसेना के मुताबिक कैटामारन आधारित पतवार विन्यास वाले इस पोत में उत्कृष्ट स्थिरता, विस्तारित डेक क्षेत्र और बेहतर समुद्री योग्यता है। लगभग 390 टन के विस्थापन वाले इस जहाज को इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के नौसेना नियमों और विनियमों के अनुरूप डिजाइन तथा निर्मित किया गया है। नौसेना में शामिल होने से पहले डीएससी ए-20 का विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) में व्यापक हाइड्रोडायनेमिक विश्लेषण और मॉडल परीक्षण किया गया, जिससे इसके इष्टतम प्रदर्शन, स्थिरता तथा दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई।
डीएससी ए-20 का शामिल होना भारत की आत्मनिर्भरता के मार्ग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर और समुद्री क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पहल की उल्लेखनीय सफलता का सशक्त उदाहरण है। यह उन्नत मंच भारतीय नौसेना, स्वदेशी जहाज-निर्माण उद्योग और राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के बीच परिणामोन्मुख सहयोग का प्रतीक बन गया है। इस पोत के शामिल होने से भारतीय नौसेना की गोताखोरी सहायता, जल के भीतर निरीक्षण, बचाव अभियानों और तटीय क्षेत्रों में परिचालन तैनाती की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। डीएससी ए-20 को कोच्चि में तैनात किया जाएगा, जहां यह दक्षिणी नौसेना कमान के अधीन अपनी परिचालन भूमिकाएं निभाएगा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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