'हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ' पर पीएम मोदी का तीखा वार: 'यह गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था, बुद्धिजीवियों को सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई'
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के 23वें संस्करण को संबोधित करते हुए देश की पिछली शासन मॉडल और औपनिवेशिक मानसिकता की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह मानसिकता वर्षों तक भारत की प्रगति में बाधक बनी रही।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि पर बात करते हुए 'हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ' के टैग पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सवाल किया कि आज जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है, तो कोई इस शब्द का इस्तेमाल क्यों नहीं करता? उन्होंने कहा कि यह शब्द तब इस्तेमाल किया गया था जब भारत 2-3 प्रतिशत की ग्रोथ रेट के लिए संघर्ष कर रहा था।
पीएम मोदी ने इस शब्द को "गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब" बताते हुए कहा: "एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि भारत की धीमी विकास दर का कारण हमारी हिंदू सभ्यता और संस्कृति है।"
उन्होंने तथाकथित बुद्धिजीवियों की आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग हर बात में सांप्रदायिकता खोजते हैं, उन्हें 'हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ' में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई, और इस टर्म को उनके दौर में किताबों का हिस्सा बना दिया गया था।
ये भी पढ़ें कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं; राज्यसभा सांसद गीता शाक्य ने प्रतिभाओं को किया सम्मानितप्रधानमंत्री ने कहा कि आज के भारत की यात्रा केवल विकास की नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण (साइकोलॉजिकल रेनसां) की भी यात्रा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि लंबी गुलामी ने भारत के आत्मविश्वास को हिला दिया था, और गुलामी की ये मानसिकता विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है, इसीलिए आज का भारत इससे मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।
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