अब बंद गले का काला कोट नहीं पहनेंगे रेल अधिकारी, ब्रिटिश विरासत को विदाई, अंग्रेजी नाम भी बदलेंगे
नई दिल्ली: रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों से औपनिवेशिक मानसिकता को पूरी तरह पीछे छोड़ने का आह्वान करते हुए शुक्रवार को कहा कि अंग्रेजों के जमाने का बंद गले वाला काला शूट अब रेलवे का औपचारिक पोशाक नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि यह पहनावा अब से समाप्त किया जा रहा है। यह ड्रेस अब तक निरीक्षण, परेड, विशेष अवसरों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पहनी जाती थी, हालांकि ग्रुप-डी, ट्रैकमैन और तकनीकी स्टाफ पर यह लागू नहीं था।
रेलमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय रेलवे 2047 तक विकसित भारत की यात्रा का मजबूत स्तंभ बनेगा, जिसमें युवा कार्यबल, नवाचार और आत्मविश्वास अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने वर्ष 2026 के लिए रेलवे के छह बड़े संकल्प भी साझा किए।
2026 में “52 हफ्ते, 52 सुधार'' योजना के तहत सेवा, उत्पादन, निर्माण, अनुरक्षण और सुविधाओं सहित हर क्षेत्र में बड़े सुधार किए जाएंगे। नवाचार और तकनीक पर जोर देते हुए रेलमंत्री ने कहा कि रेलवे अब तकनीक, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाकर पिछले सौ वर्षों की कमी को दूर करेगा। इसके लिए नई तकनीकी नीति बनाई जा रही है।
अगले वर्ष 12 नए इनोवेशन अवार्ड दिए जाएंगे, जिसमें सर्वश्रेष्ठ टीम को एक लाख रुपये और अन्य टीमों को 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा। ये पुरस्कार उन टीमों को दिए जाएंगे जिन्होंने रेलवे के लिए उपयोगी नवाचार किए हैं। स्टार्टअप्स और तकनीक लाने वालों को रेलवे से जोड़ने के लिए एक इनोवेशन पोर्टल भी जल्द लॉन्च किया जाएगा। इस पोर्टल पर समस्याएं रखी जाएंगी और उनके समाधान देने वालों का चयन किया जाएगा।
चुने गए नवाचारों की तेजी से टेस्टिंग के लिए रैपिड मैकेनिज्म बनाया जाएगा। प्रोजेक्ट ट्रायल के लिए रेलवे लागत का 50 प्रतिशत तक वहन करेगा और 1.50 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। यदि तकनीक सफल हुई तो अगले चार वर्षों तक सीरीज ऑर्डर भी दिए जाएंगे।
रेलमंत्री ने ट्रैक मेंटेनेंस और सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुरक्षण और सुरक्षा के काम को नए स्तर पर ले जाना होगा और किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशिक्षण और प्रतिभा विकास को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि रेलवे का कार्यबल अधिक सक्षम और आधुनिक तकनीक से लैस हो।
