गुरुग्राम में बंधुआ मजदूरी का मामला: हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया
गुरुग्राम। पहले बालक को बंधुआ मजदूर बनाया। उससे डेयरी में दिन-रात मजदूरी कराई। जब मशीन में आकर उसका हाथ कटा तो उसे सुनसान छोड़ दिया गया। यह मानवाधिकारों का खुलकर उल्लंघन है। जब इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं नहीं हुई। बालक से बंधुआ मजदूरी कराने और उसका शारीरिक शोषण करने के मामले में जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने आगे आकर स्वत: संज्ञान लिया है।
जानकारी के अनुसार बिहार के किशनगंज जिला के रहने वाले 15 वर्षीय बालक संतोष को रोजगार के झूठे प्रलोभन में फंसाकर बंधुआ मजदूरी के लिए हरियाणा लाया गया था। बताया गया कि बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर अपने साथियों से बिछडऩे के बाद यह बालक संतोष एक व्यक्ति के संपर्क में आया। जिसने उसे 10,000 रुपये मासिक वेतन पर डेयरी में काम का लालच दिया। उससे दो माह तक जबरन मजदूरी करवाई गई और शारीरिक उत्पीडऩ किया गया। चारा काटते समय हुई गंभीर दुर्घटना में उसका बायां हाथ कट गया। उसे डेयरी में ले जाने वाले व्यक्ति ने बिना सहायता के सुनसान स्थान पर छोड़ दिया। घायल अवस्था में बालक किसी तरह नूंह पहुंचा। वहां एक शिक्षक ने उसकी मदद की। उसे चिकित्सा सहायता दिलाई और पुलिस को सूचना दी।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग द्वारा बालक से बंधुआ मजदूरी कराने और उसका शारीरिक शोषण करने के मामले में रिपोर्ट मांगी गई। नौ अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक (एसपी) नूंह की ओर से आयोग को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया कि इस मामले में थाना जीआरपी बहादुरगढ़ में केस दर्ज किया गया है। रिपोर्ट पर सवाल खड़े करते हुए आयोग की ओर से कहा गया है कि डेयरी फार्म बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन से लगभग 20-25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पुलिस रिपोर्ट में घटना स्थल का सटीक उल्लेख नहीं किया गया और ना ही यह स्पष्ट किया गया कि पीडि़त बालक संतोष का बायां हाथ कहां और कैसे काटा गया। आयोग ने कहा है कि पुलिस रिपोर्ट में अब तक आरोपियों की पहचान, उनका पता लगाने या गिरफ्तारी संबंधी कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई गई है। आयोग का मानना है कि अब तक की जांच अपूर्ण, अस्पष्ट है।
आयोग की ओर से कहा गया है कि एफआईआर और संलग्न दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि अल्पवयस्क पीडि़त बालक संतोष को आरोपी अनिल कुमार द्वारा बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन से एक काले रंग की मोटरसाइकिल पर बिठाकर लगभग आधे घंटे की दूरी पर स्थित एक डेयरी फार्म ले जाया गया। वहां पर संतोष से बंधुआ मजदूरी करवाई गई। यह स्पष्ट तौर पर अपहरण, अवैध बंधन और शारीरिक उत्पीडऩ को दर्शाता है। इसकी गंभीरता और गहराई से जांच जरूरी है। आयोग ने इस मामले की प्रगति रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक, रेलवे, अंबाला छावनी से हासिल करने का निर्देश दिया है। हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया को मिलाकर बने पूर्ण आयोग ने अपने आदेश में यह कहा किया था कि यह घटना संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
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