बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद कहते हैं, मुसलमानों की बड़ी वक्फ जायदादे हैं, यह हमारे बुजुर्गों की कुर्बानियां हैं: मौलाना कल्बे जव्वाद
नई दिल्ली | दिल्ली की 123 वक्फ संपत्तियों के मामले पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद और एडवोकेट महमूद प्रचा ने नई दिल्ली जोर बाग स्थित कर्बला पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मौलाना कल्बे जव्वाद ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि आज बजरंग दल वाले और विश्व हिंदू परिषद वाले कह रहे […]
नई दिल्ली | दिल्ली की 123 वक्फ संपत्तियों के मामले पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद और एडवोकेट महमूद प्रचा ने नई दिल्ली जोर बाग स्थित कर्बला पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मौलाना कल्बे जव्वाद ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि आज बजरंग दल वाले और विश्व हिंदू परिषद वाले कह रहे हैं कि मुसलमानों के पास वक्फ की इतनी बड़ी जायदाद है।
उन्हें ये मालूम होना चाहिए कि ये हमारे बुजुर्गो की ये कुर्बानियां हैं। हमारे बुजुर्गो ने अपने बच्चों के लिए अपनी औलाद के लिए जायदाद नहीं छोड़ी, बल्कि गरीबों के लिए नेक कामों के लिए वक्फ की है। तुम्हारे बुजुर्गों ने अगर ये काम नहीं किया तो इसमें हमारा क्या कसूर है।
आगे मौलाना कल्बे जव्वाद ने दिल्ली आप विधायक और दिल्ली वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि अमानतुल्लाह खान ने आखिर कौन से वकील किए थे, उन्होंने क्या किया था जो कि उन्हें स्टे नहीं मिला। अमानतुल्लाह खान को हाईकोर्ट से स्टे नहीं मिला तो उन्हे सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था। वक्फ की खरबों रुपए की जायदाद है। उनका अपना मामला होता तो पता नहीं वह कहां मारे मारे फिरते आगे उन्होंने कहा उसके अलावा अमानतुल्लाह खान ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के किसी भी मेंबर को इन्फॉर्म नहीं किया कि वह क्या कर रहे हैं। यहां तक के दिल्ली वक्फ बोर्ड के जो वकील हैं उन्हें भी कोई सूचना नहीं दी गई।
आगे मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि दूसरी चीज में यह कहना चाहूंगा कि अमानतुल्लाह खान चाहे जवाब दे या नहीं दे, लेकिन वक्फ बोर्ड बनने से पहले क्या यह संपत्तिया वक्फ नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि जो एक बार वक्फ हो गया चाहे हजार साल गुजर जाएं वह वक्फ ही रहेगा। एल एंड डीओ ज्यादा महत्वपूर्ण है या सुप्रीम कोर्ट?
दूसरी चीज मैं आपको बताना चाहूंगा कि जो एक बार वक्फ हो गया तो ना तो कोई उसको खरीद सकता है, ना बेच सकता है, ना किसी को दे सकता है। और सबसे बड़ी गलतफहमी लोगों को यह दूर करना चाहिए कि वक्फ बोर्ड वक्फ की किसी भी संपत्ति का मालिक नहीं होता है बल्कि वक्फ बोर्ड के लोग वक्फ की संपत्ति के नौकर होते हैं। क्या नौकर को यह हक है वह किसी को मालिक की संपत्ति दे देगा। वक्फ की संपत्ति का मालिक अल्लाह होता है।
अल्लाह के नाम पर वक्फ किया जाता है। अल्लाह के लिए, नेक कामों के लिए सेवा के कामों के लिए अच्छे कामों के लिए अल्लाह के नाम पर वक्फ किया जाता है।
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
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