ग्रेटर नोएडा का निक्की भाटी हत्याकांड: जेठ रोहित भाटी की ज़मानत याचिका खारिज, कोर्ट ने माना 'साजिश'
ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा के सिरसा गाँव में हुए चर्चित निक्की भाटी हत्याकांड मामले में शुक्रवार को सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया। मृतका निक्की भाटी के जेठ रोहित भाटी की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया।
न्यायालय ने माना गहरी साजिश
निक्की के परिजन के अधिवक्ता उधम सिंह तोंगड़ और दिनेश कुमार कलसन ने बताया कि कासना कोतवाली पुलिस द्वारा 500 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल करने के बाद ज़मानत याचिका पर सुनवाई हुई।
ये भी पढ़ें महोबा के चर्चित किरन पुरवार हत्याकांड का खुलासा, नौकरानी ने बेटे संग की थी हत्या, दोनों गिरफ्तार-
अभियोजन पक्ष की दलील: अधिवक्ताओं ने अदालत को अवगत कराया कि निक्की की हत्या एक गहरी साजिश के तहत की गई है, जिसमें पूरा परिवार शामिल है। पुलिस ने भी चार्जशीट में षड्यंत्र के तहत हत्या की बात लिखी है।
-
कोर्ट का फैसला: अभियोजन पक्ष द्वारा मजबूती से पक्ष रखने और आरोपी रोहित की घटना में संलिप्तता को देखते हुए अदालत ने आरोपी पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया और ज़मानत याचिका को रद्द कर दिया।
क्या था निक्की भाटी हत्याकांड?
निक्की भाटी की दहेज के लिए बीते 21 अगस्त 2025 को जलाकर मार डालने का आरोप उसके पति, जेठ, ससुर और सास पर लगा था।
पुलिस ने इस मामले में हत्या (धारा 302) और साजिश रचने (धारा 120बी) के आरोप में 500 से अधिक पन्नों की चार्जशीट लगाई है। इस मामले में आरोपी पति विपिन, जेठ रोहित, ससुर सत्यवीर और सास दया गौतमबुद्ध नगर की लुक्सर जेल में बंद हैं। अदालत का यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां