बिहार शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही ! बर्खास्त शिक्षकों की इंटर परीक्षा में लगाई ड्यूटी..जानें कैसे खुली विभाग की पोल
पटना। बिहार के शिक्षा विभाग में एक बार फिर बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसे विभाग का एक और 'अजीबोगरीब कारनामा' कहा जा रहा है। इंटरमीडिएट (Intermediate) परीक्षा 2026 के सफल संचालन का दावा करने वाले विभाग की पोल तब खुल गई, जब ड्यूटी लिस्ट में उन शिक्षकों के नाम मिले जिन्हें विभाग बहुत पहले ही बर्खास्त (Dismissed) कर चुका है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार में चल रही इंटरमीडिएट परीक्षाओं के दौरान शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए जिला शिक्षा कार्यालयों से ड्यूटी लिस्ट जारी की गई। हैरानी तब हुई जब इस लिस्ट में कई ऐसे शिक्षकों के नाम 'वीक्षक' (Invigilator) के तौर पर शामिल थे, जो वर्तमान में सेवा में ही नहीं हैं।
ये भी पढ़ें संसद में हंगामे के बीच विपक्ष का सरकार पर हमला, किसानों व अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा की मांगकई ऐसे शिक्षकों को परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी के लिए पत्र भेज दिया गया, जिन्हें फर्जी डिग्री या अनुशासनहीनता के कारण महीनों पहले नौकरी से निकाला जा चुका है। लिस्ट में उन शिक्षकों के नाम भी शामिल पाए गए जिनका वेतन विभाग ने रोक रखा है या जो लंबे समय से सस्पेंड चल रहे हैं।
कैसे खुली पोल?
जब परीक्षा केंद्रों के प्रधानाध्यापकों (Principals) ने ड्यूटी ज्वाइन करने आए शिक्षकों की लिस्ट का मिलान किया, तो वे दंग रह गए। कई केंद्रों पर शिक्षक पहुँचे ही नहीं, और जब उनकी फाइल खंगाली गई तो पता चला कि वे तो विभाग के रिकॉर्ड में 'बर्खास्त' हैं। यह जानकारी सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होते ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में ड्यूटी चार्ट में बदलाव के निर्देश दिए गए।
विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
इस घटना ने बिहार शिक्षा विभाग की डिजिटल कार्यप्रणाली और डेटा मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या 'ई-शिक्षाकोष' पोर्टल पर बर्खास्त शिक्षकों का डेटा अपडेट नहीं किया गया था? बिना सत्यापन (Verification) के इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा में ड्यूटी कैसे लगा दी गई? फर्जीवाड़े के आरोप में हटाए गए शिक्षकों को परीक्षा की जिम्मेदारी देना सुरक्षा में बड़ी सेंध माना जा रहा है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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