हरियाणा: शिक्षा के मंदिर में छात्राओं की गरिमा तार-तार, मानवाधिकार आयोग ने सरकार और पुलिस से मांगी रिपोर्ट
हिसार जिले के अग्रोहा के जगरान गांव का मामला: 'उठक-बैठक' के वीडियो वायरल, 12 मई को होगी अगली सुनवाई

हिसार। हरियाणा के हिसार जिले के अग्रोहा ब्लॉक स्थित जगरान गांव के सरकारी हाईस्कूल से मानवता और छात्र मर्यादा को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ अनुशासन के नाम पर छात्राओं को 'उठक-बैठक' लगवाने और स्कूल परिसर में अपमानजनक तरीके से घुमाने का मामला तूल पकड़ चुका है। घटना के तीन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना से जुड़े तीन वीडियो जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के कार्यालय को ईमेल के जरिए भेजे गए थे। वीडियो में छात्राओं को सजा के तौर पर शारीरिक प्रताड़ना देते हुए देखा जा सकता है। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल एक जांच समिति का गठन कर दिया है, जो स्कूल के स्टाफ और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करेगी। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को मुकर्रर की गई है, जिसमें पुलिस और शिक्षा विभाग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। अब इा मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
गरिमा का उल्लंघन: आयोग
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया की पीठ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। आयोग ने स्पष्ट किया कि अनुशासन के नाम पर किसी भी प्रकार की शारीरिक सजा या मानसिक उत्पीड़न स्वीकार्य नहीं है। यह न केवल मानवाधिकारों का हनन है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत छात्राओं को प्राप्त 'गरिमा के साथ जीने के अधिकार' का भी उल्लंघन है।
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आयोग ने प्रशासन को याद दिलाया कि इस तरह की घटनाएं 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे राष्ट्रीय संकल्पों की मूल भावना के विपरीत हैं। स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी बच्चों के लिए सुरक्षित और सहानुभूतिपूर्ण माहौल तैयार करने की होती है, न कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित कर उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने की।
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मानवाधिकार आयोग ने हिसार के पुलिस अधीक्षक से निम्नलिखित बिंदुओं पर जवाब मांगा है। क्या इस मामले में अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है? मामले की वर्तमान जांच किस स्तर पर है? क्या आरोपियों के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं?
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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