स्वामी गोपालाचार्य ने की 'धुरंधर: द रिवेंज' की तारीफ, बोले-सच्चाई दिखाने वाली फिल्मों की जरूरत

मुंबई। आदित्य धर की हालिया रिलीज स्पाई एक्शन थ्रिलर फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' ने बॉक्स ऑफिस और दर्शकों के दिलों में धूम मचा दी है। रिलीज होते ही दर्शकों और आलोचकों ने इसे खूब सराहा। साथ ही, कुछ विवादास्पद मुद्दों पर भी चर्चा शुरू हो गई। फिल्म देखने के बाद कई भारतीय चौंक गए क्योंकि इसमें देश की कुछ पुरानी और हालिया घटनाओं के पीछे की कथित सच्चाई को दिखाया गया है। हाल ही में अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष स्वामी गोपालाचार्य महाराज ने फिल्म की जमकर सराहना की। उन्होंने आईएएनएस के साथ बातचीत में धुरंधर को समाज में जागरूकता फैलाने वाली फिल्म बताया। स्वामी जी का कहना है कि ऐसी फिल्में और ज्यादा बननी चाहिएं, ताकि भारतीय समाज जागरूक हो सके।
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उन्होंने आगे नोटबंदी का भी जिक्र करते हुए बताया कि मौजूदा सरकार ने नोटबंदी इसलिए लागू की थी ताकि आतंकवादी और अराजक समूहों की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके। उन्होंने कहा, "संतों ने तो शुरू से ही सरकार का समर्थन किया है। अगर किसी को फिल्म में दिखाई गई बातें गलत लग रही हैं, तो वे कोर्ट जा सकते हैं लेकिन अगर ये तथ्य सही निकले तो अदालत संज्ञान नहीं लेगी। सिनेमा का काम छिपे तथ्यों को सामने लाना है ताकि समाज जागरूक हो और सही-गलत का फैसला खुद कर सके।" स्वामी गोपालाचार्य महाराज ने कहा कि सरकार को निशाना बनाना तब सही है, जब वह देश और सनातन धर्म के लिए काम नहीं कर रही हो। उन्होंने कहा, "अगर हमारी सरकार अनुच्छेद 370 हटाने, नोटबंदी जैसे कदमों से शांति और गौरव स्थापित कर रही है, तो संतों का समर्थन हमेशा रहेगा। फिल्म ऐसे ही मुद्दों को उजागर कर समाज को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने में मदद कर रही है।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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