अब जंगल सफारी में नहीं बना सकेंगे रील..वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मोबाइल फोन 'बैन'सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वन विभाग का फैसला
जयपुर,। राजस्थान के रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में सफारी के दौरान पर्यटकों को मोबाइल फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए पार्क के अंदर मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।रणथंबोर टाइगर प्रोजेक्ट के उप वन संरक्षक (पर्यटन) संजीव शर्मा ने बताया कि इस निर्णय का उद्देश्य वन्यजीवों की रक्षा करना, उनके प्राकृतिक व्यवहार में बाधा न डालना और वन के शांत वातावरण को बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सफारी के दौरान शोर मचाना, रील और वीडियो बनाना, सेल्फी लेना और जानवरों के बहुत करीब जाना जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।
वन अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल फोन के उपयोग से पर्यटक अक्सर फोटोग्राफी और सोशल मीडिया सामग्री के लिए जंगली जानवरों के खतरनाक रूप से करीब चले जाते हैं। इससे कई सफारी वाहन एक ही स्थान पर जमा हो जाते हैं, जिससे वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही बाधित होती है और पर्यटकों की सुरक्षा को खतरा होता है। अधिकारियों ने बताया कि अत्यधिक मानवीय हस्तक्षेप से जानवरों के व्यवहार पर असर पड़ता है और रणथंबोर जैसे संवेदनशील बाघ आवासों में संरक्षण प्रयासों में बाधा आती है। वन विभाग ने पहले सफारी गाइडों और वाहन चालकों द्वारा मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे विरोध प्रदर्शनों के बाद वापस ले लिया गया था।
हालांकि, इस बार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया गया है, जिससे सभी आगंतुकों के लिए इसका उपयोग अनिवार्य हो गया है। इस कदम को जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने और रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवों और पर्यटकों दोनों के लिए एक सुरक्षित और अधिक प्राकृतिक अनुभव सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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