होलाष्टक 2026 कब से कब तक रहेगा होली से पहले , क्यों रुक जाते हैं शादी विवाह और मांगलिक कार्य
फाल्गुन माह की शुरुआत होते ही हर तरफ होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। रंग गुलाल और उत्साह का माहौल बनता है। लेकिन इसी खुशी के बीच एक ऐसा समय भी आता है जब शादी विवाह और अन्य शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है। इस अवधि को होलाष्टक कहा जाता है और ज्योतिष शास्त्र में इसे संवेदनशील समय माना गया है।
कब से शुरू होगा होलाष्टक और कितने दिन रहेगा प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक के समय को होलाष्टक कहा जाता है। पंचांग के मुताबिक इस वर्ष यह अवधि 23 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगी। सामान्य रूप से यह आठ दिनों का समय होता है लेकिन इस बार तिथि के विशेष संयोग के कारण यह नौ दिनों तक प्रभावी रहेगा।
इन दिनों को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता है। यही कारण है कि इस दौरान शादी विवाह सगाई गृह प्रवेश मुंडन और अन्य शुभ अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं।
क्यों नहीं होते शुभ कार्य
शादी विवाह सात जन्मों का बंधन माना जाता है और इसके लिए शुभ मुहूर्त का होना बेहद जरूरी होता है। शास्त्रों में होलाष्टक के दिनों को ग्रह स्थिति के कारण अस्थिर और संवेदनशील समय बताया गया है। मान्यता है कि इस दौरान ग्रहों का प्रभाव अनुकूल नहीं रहता इसलिए नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए।
इन दिनों में नया व्यवसाय शुरू करना नए घर की रजिस्ट्री कराना या निर्माण कार्य आरंभ करना भी उचित नहीं माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय धैर्य और संयम रखने का होता है।
चंद्रग्रहण का विशेष प्रभाव
आमतौर पर होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक समाप्त हो जाता है। इस बार होलिका दहन 2 मार्च को होगा। लेकिन 3 मार्च को चंद्रग्रहण लगने के कारण पूर्णिमा तिथि शाम तक रहेगी। इसी कारण होलाष्टक का प्रभाव 3 मार्च तक माना जाएगा।
ग्रहण का प्रभाव भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है और इसे भी संवेदनशील समय माना जाता है। इसलिए इस बार होलाष्टक की अवधि एक दिन बढ़ गई है।
प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ी है मान्यता
होलाष्टक की मान्यता भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद और उनकी बुआ होलिका की कथा से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों में प्रह्लाद को उनके पिता ने अनेक यातनाएं दी थीं। अंत में होलिका अग्नि में बैठी और प्रह्लाद को भी साथ ले गई। लेकिन ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई।
इसी घटना की स्मृति में होली का पर्व मनाया जाता है और उससे पहले के आठ दिनों को अशुभ माना जाता है। यह समय हमें धैर्य और आस्था का संदेश देता है।
होलाष्टक के बाद फिर शुरू होंगे शुभ कार्य
3 मार्च के बाद जब होलाष्टक समाप्त होगा तब फिर से शादी विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो सकेगी। मार्च महीने में एक बार फिर से शहनाइयां गूंजने लगेंगी और घरों में उत्सव का माहौल लौट आएगा।
होलाष्टक हमें यह सिखाता है कि हर कार्य का एक सही समय होता है और शुभ अवसर का इंतजार करना ही समझदारी है।
Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। तिथि और मुहूर्त की सटीक जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंडित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य करें।
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