गणतंत्र दिवस पर सोचे ज़रूर !
74 वर्षों से हम गणतंत्र दिवस मनाते आ रहे हैं। देखा जा रहा है कि इस उत्सव को मनाने का हमारा उत्साह प्रति वर्ष कम होता जा रहा है। यह चिंतनीय है और विचारणीय भी है। हम भारतीयों की सभ्यता और संस्कृति विश्व में चर्चा का विषय है और रहेगी, जिस पर हमें नाज है। […]
74 वर्षों से हम गणतंत्र दिवस मनाते आ रहे हैं। देखा जा रहा है कि इस उत्सव को मनाने का हमारा उत्साह प्रति वर्ष कम होता जा रहा है। यह चिंतनीय है और विचारणीय भी है। हम भारतीयों की सभ्यता और संस्कृति विश्व में चर्चा का विषय है और रहेगी, जिस पर हमें नाज है। गणतंत्र दिवस को आज मनाने से पहले उसकी सार्थकता को समझने की आवश्यकता है, क्योंकि आज हमारे देशवासियों में राष्ट्र प्रेम की भावना के अभाव को महसूस करते हुए हम भारतीयों की प्रमाणिकता को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।
छोटी-छोटी बातों पर हड़ताल, कानून तोडऩा, राष्ट्रीय सम्पत्ति में तोडफ़ोड़, उसे जलाना, अपनी वीर सेना पर अनुचित सवाल उठाना, अपमानजनक टिप्पणी करना हमारा स्वभाव बन गया है। कई बार पयर्टक के रूप में आई विदेशी महिलाओं के साथ शर्मसार करने वाला आचरण ये सब बातें हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी ही तो दे रहा है।
रूककर सोचे हमारे लोगों में देश हित की उपेक्षा का भाव क्यों आ रहा है। इन्हें राष्ट्र प्रेम से ओत-प्रोत करने के क्या उपाय किये जाये ताकि वे अपने स्वार्थों की पूर्ति की भावना से पहले राष्ट्र हित के बारे में सोचे।
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
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