धन और परिवार: संतुलन में ही सफलता

आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान जिस 'धन' के पीछे दिन-रात भाग रहा है, वह जीवन जीने का साधन तो हो सकता है, लेकिन साध्य नहीं। समाज में एक पुरानी लोकोक्ति प्रचलित है कि 'पैसा खुदा तो नहीं, पर खुदा से कम भी नहीं।' हालांकि इसमें अतिश्योक्ति अलंकार का पुट है, लेकिन वर्तमान परिवेश में संसार के भीतर धन की महत्वपूर्ण भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
परिवार के पालन-पोषण से लेकर बच्चों की उच्च शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्वों की पूर्ति और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए धन की आवश्यकता कदम-कदम पर पड़ती है। वेदों में भी पुरुषार्थ के माध्यम से पर्याप्त धन कमाने की आज्ञा दी गई है, क्योंकि प्रचुर धन व्यक्ति के आत्मविश्वास को बनाए रखने में सहायक होता है। लेकिन, क्या केवल धन कमाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है?
धन की दौड़ में पीछे छूटता परिवार आज की विडंबना यह है कि व्यक्ति धन कमाने की अंधी दौड़ में इतना व्यस्त है कि वह उन लोगों के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है, जिनके लिए वह यह सब कर रहा है। माता-पिता को यह आभास ही नहीं है कि उनके बच्चे क्या कर रहे हैं और किस दिशा में जा रहे हैं। बच्चों को महंगे खिलौनों और गैजेट्स से कहीं अधिक अपने माता-पिता के साथ और उनके स्नेह की आवश्यकता होती है।
कर्तव्य बोध ही असली धर्म धर्म का सच्चा अर्थ कर्मकांड नहीं, बल्कि 'कर्तव्य परायणता' है। घर के मुखिया का यह प्राथमिक धर्म है कि वह अपने परिजनों के साथ बैठकर उन्हें कर्तव्य बोध से अवगत कराए। घर में 'धर्म चर्चा' का दीप जलाना अनिवार्य है, ताकि परिवार में सद्गुणों के फूल खिल सकें। यदि संतान को माता-पिता का सान्निध्य और अच्छे संस्कार नहीं मिले, तो अर्जित किया गया सारा धन भविष्य को सुरक्षित नहीं रख पाएगा।
निष्कर्ष: सुसंस्कृत संतान ही असली सुरक्षा याद रखिए, आपका भविष्य उस बैंक बैलेंस या संपत्ति से सुरक्षित नहीं होगा जिसे आप इकट्ठा कर रहे हैं। आपके बुढ़ापे और भविष्य की असली सुरक्षा आपकी 'सुसंस्कारित और सुसंस्कृत संतान' में निहित है। धन केवल सुविधाओं का अंबार लगा सकता है, लेकिन शांति और गौरव केवल संस्कारों से ही प्राप्त होता है। इसलिए धन कमाएं, लेकिन अपनों के लिए समय भी बचाएं।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

टिप्पणियां