यूपी में 'पंडित' शब्द पर फिर भड़का विवाद: कक्षा 7 की संस्कृत परीक्षा का प्रश्न बना मुद्दा, शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश
आगरा के परिषदीय स्कूलों में पहेली के जरिए 'पंडित' शब्द के प्रयोग पर मचा बवाल; दरोगा भर्ती के बाद अब शिक्षा विभाग की बड़ी चूक, BSA ने बैठाई जांच और शासन को भेजी रिपोर्ट

आगरा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा के बाद अब ताजनगरी आगरा के परिषदीय स्कूलों की वार्षिक परीक्षा में 'पंडित' शब्द के प्रयोग को लेकर एक नया बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कक्षा सात के संस्कृत के प्रश्न पत्र में पूछी गई एक पहेली (प्रहेलिका) ने ब्राह्मण समाज और शिक्षक संगठनों को आक्रोशित कर दिया है। आरोप है कि शिक्षा विभाग और पेपर सेट करने वाले जिम्मेदारों ने जानबूझकर एक विशिष्ट समाज को निशाना बनाने वाली शब्दावली का प्रयोग किया है। मामला तूल पकड़ते ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने इस संवेदनशील प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
मंगलवार को जनपद के परिषदीय स्कूलों में कक्षा सात की संस्कृत विषय की परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र के पांचवें क्रमांक पर एक पहेली पूछी गई थी, जिसका आशय था कि "वह कौन है जो बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है, लेकिन 'पंडित' नहीं है?" इस सवाल के विकल्पों में बादल, पक्षी, वायु और पत्र दिए गए

थे। जैसे ही यह प्रश्न पत्र सार्वजनिक हुआ, विरोध के स्वर तेज हो गए। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का दावा है कि पाठ्य पुस्तक के संबंधित पाठ में ऐसी किसी पहेली का अस्तित्व ही नहीं है, जिसे आधार बनाकर यह विवादास्पद सवाल पूछा गया।
शिक्षक संघ के नेताओं ने इस कृत्य को सोची-समझी साजिश करार देते हुए पेपर सेटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि अभी कुछ ही दिन पहले 14 मार्च को दरोगा भर्ती परीक्षा में भी 'पंडित' शब्द के विवादास्पद प्रयोग पर प्रदेश भर में भारी बवाल हुआ था, जिसके बाद स्वयं मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ ने सभी भर्ती बोर्डों को जाति या धर्म पर अमर्यादित टिप्पणी न करने की सख्त हिदायत दी थी। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद आगरा में हुई इस पुनरावृत्ति ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
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