ओरल हेल्थ बिगड़ी तो दिमाग पर भी पड़ सकता है असर! जानिए कनेक्शन

नई दिल्ली। दांतों और मसूड़ों की सेहत सिर्फ मुस्कान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर हमारे दिमाग और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है।
हाल के कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि अगर हम अपने दांतों और मसूड़ों का ठीक से ख्याल नहीं रखते, तो इसका असर सिर्फ मुंह तक नहीं रहता, बल्कि पूरे शरीर और खासतौर पर दिमाग पर भी पड़ सकता है। जब दांत में कीड़ा लग जाता है, मसूड़े सूज जाते हैं या इंफेक्शन हो जाता है, तो लगातार दर्द बना रहता है। ये दर्द आपकी नींद खराब कर सकता है, खाने-पीने में दिक्कत दे सकता है और धीरे-धीरे आपको चिड़चिड़ा बना सकता है।
नींद पूरी न होने और दर्द के चलते तनाव और एंग्जायटी बढ़ना आम बात है। अगर आपके दांत पीले हैं, टूटे हुए हैं या सांस से बदबू आती है, तो आप लोगों के सामने खुलकर बात करने से कतराने लगते हैं। कई लोग तो हंसना तक कम कर देते हैं। इसका सीधा असर आत्मविश्वास पर पड़ता है और धीरे-धीरे ये आपकी मानसिक सेहत को भी प्रभावित करता है। एक और अहम पहलू बैक्टीरिया भी है। जब हम मुंह की सफाई ठीक से नहीं करते, तो हानिकारक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। ये बैक्टीरिया खून के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, जिसमें दिमाग भी शामिल है। कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि खराब ओरल हेल्थ का संबंध मेमोरी लॉस और अन्य कॉग्निटिव समस्याओं से हो सकता है। सामाजिक जीवन पर भी इसका असर साफ दिखता है। मुंह से बदबू या दांतों की खराब हालत के कारण लोग दूसरों से दूरी बनाने लगते हैं।
ये भी पढ़ें भागदौड़ भरी जिंदगी में हेल्दी रहने का आसान तरीका: ओट्स से स्प्राउट्स तक, बिना पकाए खाएं ये चीजें वे पार्टियों, मीटिंग्स या दोस्तों के साथ समय बिताने से बचते हैं। इससे अकेलापन बढ़ सकता है, जो मानसिक सेहत के लिए अच्छा नहीं है। अच्छी बात ये है कि इन समस्याओं से बचना बहुत मुश्किल नहीं है। रोजाना दो बार ब्रश करना, खासकर रात में सोने से पहले, फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना, मीठी चीजों का कम सेवन करना और समय-समय पर डेंटिस्ट के पास जाना ये छोटे-छोटे कदम आपको बड़ी परेशानियों से बचा सकते हैं। बच्चों के लिए भी ये आदतें बहुत जरूरी हैं। अगर बचपन से ही उन्हें दांतों की सही देखभाल सिखा दी जाए, तो वे आगे चलकर दांत स्वस्थ और मजबूत दोनों रहेंगे।
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