कम या ज्यादा नींद दोनों नुकसानदेह! जानिए क्या कहते हैं यूनानी चिकित्सा के सिद्धांत
नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कोई देर रात तक जाग रहा है तो कोई जरूरत से ज्यादा सो रहा है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि नींद और जागने का सही संतुलन कितना जरूरी है। यूनानी चिकित्सा पद्धति में इसे स्वस्थ जीवन के बुनियादी उसूलों में से एक माना गया है। अगर इसका तालमेल बिगड़ जाए तो शरीर में कई तरह की बीमारियां जन्म लेने लगती हैं।
अधिक नींद लेने से शरीर में बुरूदत (ठंडक) और रुतूबत (अत्यधिक नमी) बढ़ जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि शरीर की कार्यक्षमता सुस्त पड़ने लगती है, पाचन कमजोर हो जाता है और आलस्य छा जाता है। ज्यादा सोने वाले लोगों में मोटापा, भारीपन, गैस, कफ की शिकायत और काम में मन न लगने जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं। यूनानी चिकित्सा में सेहतमंद रहने के लिए नींद का समय हर व्यक्ति के मिजाज और उम्र के हिसाब से तय करने की सलाह दी जाती है। बच्चों को ज्यादा नींद की जरूरत होती है, जबकि बुजुर्गों को कम। इसी तरह गर्म मिजाज वाले लोगों को संतुलित और हल्की नींद की जरूरत होती है, जबकि ठंडे मिजाज वालों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए कि वे जरूरत से ज्यादा न सोएं। सबसे अच्छी नींद वही मानी जाती है, जो रात के समय ली जाए और सुबह ताजगी के साथ आंख खुले।
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लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

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