लाभप्रद भी है आलू का सेवन
आलू वैसे तो सब्जियों का बादशाह है पर आलू के बारे में अक्सर यह भी सुनने में आता है कि अधिक आलू खाओगे तो मोटे हो जाओगे, इसलिए इसे कम खाना ही अच्छा है। भारतीय व्यंजनों में तो आलू अक्सर प्रयोग होता है। आलू टिक्की, चिप्स, वैफर्स, आलू के पापड़, परांठे, आलू वाले समोसे, आलू […]
आलू वैसे तो सब्जियों का बादशाह है पर आलू के बारे में अक्सर यह भी सुनने में आता है कि अधिक आलू खाओगे तो मोटे हो जाओगे, इसलिए इसे कम खाना ही अच्छा है।
भारतीय व्यंजनों में तो आलू अक्सर प्रयोग होता है। आलू टिक्की, चिप्स, वैफर्स, आलू के पापड़, परांठे, आलू वाले समोसे, आलू भुजिया सब चीजों के नाम से तो मुंह में पानी भर आता है।
वास्तव में आलू तेल में जाने से बहुत फैटनिंग हो जाता है पर इसका अर्थ यह नहीं कि इसे अपने भोजन से निकाल देना चाहिए। शोध यह भी बताती है कि आलू में भी कई पोषक तत्व हैं। इन्हें सीमित मात्र में उबाल कर या भून कर खाया जा सकता है। खाने के अलावा भी आलू से कई लाभ होते हैं, आइए जानिए।
ये भी पढ़ें चिपचिपे और ऑयली बालों से परेशान? रीठा-शिकाकाई से नीम तक, ये चीजें दिलाएंगी समस्या से छुटकाराआलू में विटामिन सी होता है। इसके अलावा विटामिन बी 6, आयरन और कॉपर भी पर्याप्त में होता है।
आलू का सेवन उबालकर या भूनकर कर करना चाहिए। इससे आपका वजन नहीं बढ़ेगा। वजन तभी बढ़ता है जब आलू को फ्राई या डीप फ्राई करने के बाद खाया जाता है। वैसे 1०० ग्राम आलू में केवल एक ग्राम फैट होता
है।
आलू एंटी आक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है। रोजाना एक आलू खाने से हम कई बीमारियों से बचे रह सकते हैं
आलू आसानी से पच जाता है। इससे हमारा पाचन सिस्टम ठीक बना रहता है।
आलू में पाए जाने वाले कैमिकल्स ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखते हैं।
रूसी त्वचा वालों को पोटेटो फेस मास्क का प्रयोग फायदेमंद होता है।
आंखों के नीचे काली त्वचा को साफ करने के लिए आलू के स्लाइस आंखों के नीचे रगडऩे और उसका जूस लगाने से लाभ मिलता है।
कच्चे आलू का जूस अल्सर, एसिडिटी और लिवर से जुड़ी समस्याओं से बचाता है।
उबले आलू में सबसे कम कैलोरीज होती है। 1०० ग्राम उबले आलू में 66 कैलोरीज होती है।
-सुनीता गाबा
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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