बोगनवेलिया फूल: सिर्फ सुंदर ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों का खजाना, तना से जड़ तक फायदेमंद
नई दिल्ली। बोगनवेलिया का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के सामने नारंगी, सफेद और गुलाबी चटकीले रंगों के फूलों वाला खूबसूरत पौधा सामने आ जाता है। ये देखने में जितना सुंदर होता है, उतना ही औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आयुर्वेद में बोगनवेलिया को खास स्थान प्राप्त है। इसके फूलों के साथ ही जड़ और तना तक हर हिस्सा फायदेमंद और कई समस्याओं से निजात दिलाने में कारगर होता है।
बिहार सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग के अनुसार, यह पौधा सिर्फ सजावट के लिए नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है। इसके फूल, पत्तियां और तना तक पारंपरिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोगी साबित होते हैं। बोगनवेलिया निक्टैजिनेसी परिवार से संबंधित है। यह भारत के साथ ही दक्षिण अमेरिका सहित दुनिया भर में बाग-बगीचों, घरों और सड़कों के किनारे देखा जाता है। इसके चटक रंग के फूल लाल, गुलाबी, बैंगनी, नारंगी, सफेद और पीले रंगों में खिलते हैं, जो इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं, लेकिन इसकी सुंदरता के साथ-साथ इसके औषधीय लाभ भी कम नहीं हैं। पर्यावरण एवं वन विभाग ने बताया कि बोगनवेलिया के विभिन्न हिस्सों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता रहा है।
इसके फूलों में एंटी-इंफ्लेमेटरी या सूजन कम करने वाले और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इनका काढ़ा या चाय बनाकर पीने से खांसी, सर्दी-जुकाम और गले की खराश में राहत मिलती है। पत्तियों का रस या काढ़ा पाचन तंत्र को मजबूत करने, कब्ज दूर करने और पेट दर्द में फायदेमंद माना जाता है। इसके तने और छाल का भी उपयोग होता है। तने से निकलने वाला रस या काढ़ा ब्लड शुगर नियंत्रण करने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों और लोक चिकित्सा में बोगनवेलिया को सूजन, बुखार और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए भी कारगर बताया गया है। खास बात है कि बोगनवेलिया आसानी से उगने वाला, कम पानी और कम देखभाल वाला पौधा है। यह धूप में अच्छी तरह बढ़ता है और सूखे में भी खिला रहता है।
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